देश के परिवहन मंत्रियों ने सड़क सुरक्षा के लिए गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर के रूप में टीएमसी कांगड़ा के सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में रोड सेफ्टी पर गहन मंथन किया। चर्चा के बाद तैयार मसौदे की जानकारी सड़क सुरक्षा के लिए गठित ग्रुप ऑफ मिस्टिर के अध्यक्ष राजस्थान के परिवहन मंत्री यूनिस खान और हिमाचल के परिवहन मंत्री जीएस बाली ने दी।
कमेटी ने करीब 34 सिफारिशें रखीं। इनकी रिपोर्ट दो दिन में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को सौंपी जाएगी। केंद्रीय मंत्री रिपोर्ट कैबिनेट में रखेंगे। सब कुछ ठीक रहा तो रोड सेफ्टी पर दिए गए सुझावों को मानसून सत्र में रखा जाएगा। पत्रकार वार्ता में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर के अध्यक्ष राजस्थान के पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनिस खान में कहा कि मानसून सत्र में मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन को लाए जाने वाले एक्ट के मसौदे में समूह की संस्तुतियों का उपयोग किया जा सकेगा।
बैठक में हाईवे पर हर 100 किमी दायरे में आधुनिक सुविधाओं से लेस ट्रॉमा सेंटर खोलने की संस्तुति दी। कहा कि इससे हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के घायलों को तुरंत बेहतर इलाज मिलेगा। संस्तुति दी गई कि देश भर के बाजारों की पार्किंग में निजी वाहनों के लिए 10 फीसदी कोटा निर्धारित होना चाहिए।
पब्लिक और ग्रामीण परिवहन को प्रमोट करने को सिफारिश की गईं। चर्चा हुई कि 50 से 100 किमी सफर के बाद परिवहन बसों के चालकों को थोड़ा आराम दिया जाए, जिससे दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके। हिट एंड रन मामलों में क्षतिपूर्ति बढ़ाने को कहा गया।
इन मुददों पर भी चर्चा :
- हाईवे पर बैरियर फ्री ट्रांसपोर्ट पर चर्चा हुई। कहा कि टोल रोड्स की सभी लेन पर आरएफआईडी कार्ड के माध्यम से ई टोलिंग सुविधा होनी चाहिए।
- माल परिवहन के लिए अवरोध रहित संचालन की व्यवस्था।
- नगरीय टैक्सी परमिट व्यवस्था का सरलीकरण और उदारीकरण विषयों पर चर्चा की गई।
- ई-रिक्शा, दोपहिया टैक्सी और सीट शेयरिंग को प्रोत्साहन देने की बात।
- नागरिकों को बेहतर सेवाएं देने को सार्वजनिक परिवहन प्रणाली सुदृढ़ करने पर मंत्रणा
पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याएं देखेंगे बाली
पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों की विशिष्ट समस्याओं के अध्ययन को परिवहन मंत्री जीएस बाली की अध्यक्षता में उपसमिति बनाई गई। वह पर्वतीय इलाकों में सड़क सुरक्षा पर सुझाव लेंगे। इसकी रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भेजेंगे। बाली ने कहा कि उप समिति की बैठक शीघ्र होगी। भारतीय लाइसेंस प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।