प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों की अब साल भर की असेसमेंट के आधार पर ग्रेडिंग की जाएगी। सर्व शिक्षा अभियान में सरकार ने पहली से आठवीं कक्षा में सख्ती से सतत और व्यापक मूल्यांकन को लागू करने का फैसला लिया है।
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अब आठवीं कक्षा तक के बच्चों के साल में 4 बार 70-70 नंबर के क्लास टेस्ट और 2 बार 100-100 नंबर की परीक्षाएं होंगी। क्लास टेस्ट और परीक्षाओं के नंबर जोड़कर हर बच्चे को ग्रेड दिया जाएगा। अभी तक आठवीं कक्षा तक टेस्ट लेने की कोई भी अनिवार्यता नहीं थी।
कई स्कूलों में टेस्ट होते थे, जबकि कई स्कूलों में शिक्षक मर्जी से छात्रों का मूल्यांकन कर उन्हें अगली कक्षा में भेज देते थे। प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नई व्यवस्था को लागू किया गया है।
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परीक्षाओं का यह रहेगा शेड्यूल
जून के अंतिम और दिसंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली परीक्षाएं तीन घंटे की होंगी।
शीतकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों में मार्च महीने के अंतिम सप्ताह, मई महीने के दूसरे सप्ताह, अगस्त के तीसरे सप्ताह, और अक्तूबर के तीसरे सप्ताह में पहले दो पीरियडों (70 मिनट) में क्लास टेस्ट होगा।
इसके बाद अन्य पीरियड नियमित तौर पर लगेंगे। जून के अंतिम और दिसंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली परीक्षाएं तीन घंटे की होंगी। ग्रीष्मकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों में मई के दूसरे सप्ताह, जून के तीसरे सप्ताह, नवंबर के तीसरे सप्ताह और जनवरी के पहले सप्ताह में पहले दो पीरियडों (70 मिनट) में क्लास टेस्ट होगा।
इसके बाद अन्य पीरियड नियमित तौर पर लगेंगे। सितंबर के तीसरे सप्ताह और मार्च के दूसरे सप्ताह में परीक्षाएं तीन घंटे की होंगी।
ग्रेड से होगा छात्रों का मूल्यांकन
परीक्षाओं के आधार पर छात्रों को ग्रेड दिए जाएंगे। 80 से 100 के बीच नंबर प्राप्त करने वालों को ए ग्रेड।
- फोटो : Demo pic
परीक्षाओं के आधार पर छात्रों को ग्रेड दिए जाएंगे। 80 से 100 के बीच नंबर प्राप्त करने वालों को ए ग्रेड। 65 से 79 तक बी ग्रेड, 50 से 64 तक सी ग्रेड, 35 से 49 तक डी ग्रेड और 1 से 34 के बीच अंक प्राप्त करने वाले बच्चों को ई ग्रेड दिया जाएगा।
खामियां पता लगाने को लगेंगे परफार्मेंस रजिस्टर
स्कूली बच्चों की खामियों का पता लगाने के लिए हर स्कूल में परफार्मेंस रजिस्टर लगाए जाएंगे। शिक्षकों को इसमें हर बच्चे का ब्योरा लिखना होगा। परीक्षाओं में किस विषय में कितने अंक आए? किन कारणों से बच्चे ने अच्छा परिणाम नहीं दिया?
इन खामियों को दूर करने के लिए शिक्षक क्या कर रहे हैं? इसका ब्योरा रजिस्टरों में लिखा जाएगा। स्कूलों में किए गए बदलाव को जांचने के लिए विशेष जांच दल भी गठित होंगे। दल औचक निरीक्षण करेंगे।
राइट टू एजूकेशन एक्ट में पहली से आठवीं कक्षा तक स्कूली बच्चों को फेल नहीं किया जाता है।
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राइट टू एजूकेशन एक्ट में पहली से आठवीं कक्षा तक स्कूली बच्चों को फेल नहीं किया जाता है। पढ़ाई में कमजोर बच्चों को भी अगली कक्षा में दाखिल किया जाता है। इस व्यवस्था के चलते नवीं कक्षा में फेल होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ जाती है।
आठवीं तक पास और फेल की व्यवस्था न होने से उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कई छात्र पिछड़ भी जाते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए अब साल में छह बार परीक्षाएं लेने का फैसला लिया है।
सतत और व्यापक मूल्यांकन को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है। कई जगह दौरा करने के बाद ज्ञात हुआ है कि आदेशों का पालन नहीं हो रहा। ऐसे में अब आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की जाएगी। ग्रेडिंग प्रक्रिया से स्कूली बच्चों का ज्ञान बढ़ाने में मदद मिलेगी। बच्चे साल भर पढ़ाई में व्यस्त रह सकेंगे।
- घनश्याम चंद, राज्य परियोजना निदेशक