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मुख्यमंत्री के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे अधिकारी

Wed, 08 Jan 2020 01:45 PM IST
अरविन्द ठाकुर रितेश गुलेरिया, अमर उजाला, बिलासपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के चार जिलों में सड़कों के फोरलेन कार्य की जद में आए विस्थापितों और प्रभावितों की समस्याओं और उनके हकों को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। हैरानी की बात है कि इस मामले में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आदेश को ठेंगा दिखा रखा है। सीएम के आदेश के एक साल बाद भी मामले में रिपोर्ट सरकार तक नहीं पहुंची है। आरटीआई के माध्यम से मिली सूचना ने इसका खुलासा कर दिया है।

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सूचना में बताया गया है कि इस मामले में किसी भी जिला उपायुक्त की रिपोर्ट अभी तक नहीं पहुंची है। सदस्य सचिव एवं सहायक आयुक्त मंडलायुक्त शिमला ने पत्र संख्या डिव0.कमर0(एसएमएल)आर(17)2/2017-8104 दिनांक 23 दिसंबर 2019 के माध्यम से कहा कि जब तक सभी जिलों से रिपोर्ट नहीं आती तब तक यह मामला कैबिनेट सब कमेटी में नहीं लिया जा सकता है। साफ है कि प्रदेश के अधिकारी मुख्यमंत्री तक के आदेश पर गंभीर नहीं हैं। 

बताते चलें कि प्रदेश में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की शिकायत और समाचार पत्रों में आए दिन प्रकाशित हो रह खबरों का सरकार ने संज्ञान लिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार की ओर से कुल्लू, मंडी, बिलासपुर और सोलन जिला के उपायुक्त को आदेश दिए गए थे कि विस्थापितों की समस्याओं का मौके पर जाकर निरीक्षण करें। मौके पर ही समस्याओं का समाधान करने के लिए भी कहा गया था। समस्याओं के हल के लिए इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट सरकार ने संबंधित जिलों से मांगी थी।
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सरकार के आदेश पर इन जिलों में संबंधित उपमंडल के एसडीएम को मामले में कार्यवाही कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। यह रिपोर्ट चार जिलों के करीब 15 उप मंडलाधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर तैयार करनी थी। लेकिन, सरकार से लेकर जिला उपायुक्तों के आदेश मानों हवा हवाई होकर रह गए। एक साल में मात्र घुमारवीं के एसडीएम ही अपनी रिपोर्ट दे पाए। जबकि, करीब 14 एसडीएम की रिपोर्ट का एक साल बाद भी सरकार को इंतजार है। 


मामले में हस्तक्षेप करें सीएम
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने अधिकारियों की इस लेट लतीफी  पर गहरा रोष जताते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से हस्तक्षेप करने की मांग की है। समिति के उप प्रधान अशोक कुमार, महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा, राकेश कुमार, श्रवण कुमार, सुभाष व सदा राम ने कहा कि जनता की समस्याओं और मुद्दों के प्रति अधिकारियों की अनदेखी चिंतनीय विषय है।

उन्होंने कहा कि जब अधिकारी सीएम का आदेश तक नहीं मान रहे हैं तो आम लोगों के प्रति उनका क्या रुख होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर लापरवाह अधिकारियों को कार्यवाही के लिए सख्त हिदायत दें।

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