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पढ़िए, हिमाचल की राजनीति से क्यों दुखी हैं राज्यपाल?

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हिमाचल की राज्यपाल उर्मिला सिंह का पांच साल का कार्यकाल 24 जनवरी को समाप्त हो रहा है। 28 जनवरी को राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह प्रदेश का अतिरिक्त कमान संभालेंगे।
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इससे ठीक पहले उर्मिला सिंह 27 जनवरी को मध्य प्रदेश के लिए रवाना हो जाएंगी। प्रदेश में उनका पांच साल का किस प्रकार अनुभव रहा। भविष्य में किस तरह से प्रदेश को विकास के पथ पर अग्रसर किया जा सकता है।

प्रदेश की राजनीतिक हालात को लेकर वह क्या सोचती है। इन तमाम बिंदुओं पर राज्यपाल ने अमर उजाला के मुख्य संवाददाता प्रेम प्रताप सिंह ने विस्तार से बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश :-
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ये है भविष्य की योजना

सवाल : 27 जनवरी के बाद आप किस भूमिका में नजर आएंगे। भविष्य की आपकी क्या योजना है।
जवाब : मै शुरू से ही एक राजनीतिक व्यक्ति रही हूं। आगे भी राजनीति में लौटने की पूरी तैयारी है। कांग्रेस की ओर से जो भी मुझे जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसे निभाने की कोशिश करूंगी।

सवाल : लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का लगातार खराब प्रदर्शन रहा है। क्या यह सोनिया और राहुल के नेतृत्व की विफलता मानती है।
जवाब : अभी मै राज्यपाल के पद पर हूं। ऐसे में मेरे के लिए किसी प्रकार की राजनीतिक सवालों का जवाब दे पाना संभव नहीं हैं।

सवाल : हिमाचल में लगातार पांच साल तक राज्यपाल के पद पर रहीं। प्रदेश के राजनीतिक दलों से कोई गिला शिकवा?
जवाब : मैं प्रदेश की भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकारों में राज्यपाल रही, लेकिन दोनों ही दलों ने मुझे सहयोग किया। किसी की ओर से कोई गिला शिकवा का मौका ही नहीं मिला। पांच साल कैसे गुजर गया। मुझे पता ही नहीं चला।

चार्जशीट पर ये बोली राज्यपाल

सवाल : हिमाचल में विपक्ष लगातार हावी रहा है। धूमल सरकार में कांग्रेस हावी थी, अब वीरभद्र सरकार में भाजपा हावी है। आप क्या कहना चाहेंगी?
जवाब : लोकतंत्र में विपक्ष मजबूत होना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि विधानसभा में किसी मुद्दे पर चर्चा ही नहीं हो। सदन से वाकआउट करने और न चलने देने से पब्लिसिटी तो मिल जाएगी, लेकिन इससे जनता का हित नहीं होगा।

सवाल : धूमल सरकार के दौरान कांग्रेस ने और वीरभद्र सरकार में भाजपा ने आपको चार्जशीट दिया, लेकिन आपने कुछ भी नहीं किया। ऐसा क्यों?
जवाब : लोकतंत्र में राज्यपाल की भूमिका एक न्यायाधीश की तरह होती है। वह किसी के साथ अन्याय नहीं कर सकता है। ठीक उसी प्रकार मैने चार्जशीट मामले पर ही फैसला लिया है।

दिग्गज नेताओं को दी काम की सलाह

सवाल : क्या आपको लगता है कि वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल की राजनीति व्यक्तिगत रंजीश में तब्दील हो गई है? मीडिया में लगातार एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हैं?
जवाब : हिमाचल को छोड़कर देश किसी भी प्रदेश में ऐसी राजनीतिक नहीं है। इससे प्रदेश का नुकसान छोड़कर भला होने वाला नहीं है। ये दुखी करने वाली बात है। मेरे से दोनों उम्र में बड़े हैं, लेकिन मौका मिले तो मेरा सुझाव होगा कि व्यक्तिगत के बजाय सभी नेता प्रदेश के विकास पर फोकस करें।

सवाल: हिमाचल के विकास पर आप क्या कहना चाहेंगी? किस तरह से प्रदेश को दूसरे राज्यों के मुकाबले विकास की दौर में शामिल किया जा सकता है।
जवाब : चंडीगढ़ और शिमला के बीच महज 100 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन इन दोनों शहरों के विकास में जमीन और आसमान का अंतर है। हिमाचल में कोई भी पर्यटक एक बार आता है, वह अगली बार नहीं आ पाता। जबकि, गोवा में एक बार जाने वाला बार-बार जाता है। प्रदेश की सड़कें पर्यटन के लिहाज से मुफीद नहीं है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

विकास के लिए दिए अहम सुझाव

सवाल: प्रदेश में किस तरह से रोजगार और पर्यटन का बढ़ावा दिया जा सकता है? आपका कोई सुझाव?

जवाब : हिमाचल में 70 फीसदी पर्यटन सेवाएं प्रदेश के बाहर के लोग दे रहे हैं। अगर प्रदेश के युवाओं के लिए टूरिस्ट गाइड और आर्कोलोजी का अलग से कोर्स शुरू किया जाए। खासतौर पर प्रदेश की माता मंदिरों की बेहद खराब स्थिति है। यहां सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है। इसे सरकार के बजाय वैष्णो देवी में बने साइन बोर्ड की तर्ज पर कोई स्वतंत्र एजेंसी का गठन किया जाना चाहिए, जिसके माध्यम से सभी मंदिरों का संचालन किया जाए। पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जाए। इसके लिए मैंने प्रयास भी किए, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा कुछ नहीं हो पाया। यहां के लोग महज सेब तक ही खुद को सीमित न रखे। आगे भी सोचे।
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मोदी से नहीं कोई परेशानी

सवाल : नरेंद्र मोदी के सरकार के कार्यकाल में भी आपने सात महीने काम किया? कोई दबाव या परेशानी महसूस हुई?
जवाब : नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मैंने जून में मुलाकात की थी। उनसे बेहद अच्छे माहौल में मिली थी। केंद्र की ओर से किसी तरह का कोई दबाव नहीं रहा।

सवाल : हिमाचल में कोई ऐसा क्षण, जोकि आपको पूरा जीवन कचोटता रहे?
जवाब : नहीं। पांच साल कैसे बीत गए। पता ही नहीं चला। लगा अभी पांच दिन पहले ही तो आई हूं? प्रदेश के लोगों से बहुत प्यार और सम्मान मिला। इसके लिए यहां के लोगों को शुक्रिया?
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