यही करण है कि वर्ष 1988 से लेकर आज तक हिमाचल में सीबाक्थार्न का विस्तार नहीं हो पाया और न ही किसानों को इसके प्रति जागरूक किया जा सका है।राज्यपाल ने कहा कि भविष्य में कभी ऐसा कोई सेमिनार होता है तो अधिक संख्या में किसान बुलाए जाएं।
सब कुछ कागजों में हो रहा है, हकीकत कुछ और ब्यां कर रही है। गोष्ठियों में करोड़ों खर्च करने से इसका लाभ किसी को नहीं होगा। धरातल पर बहुत कुछ करने की जरूरत है। पालमपुर विश्वविद्यालय इस दिशा में और अधिक कार्य करे।