बजट सत्र के आखिरी दिन पास हुए विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के वेतन-भत्तों में बेतहाशा बढ़ोतरी के बिल को राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मंजूरी दे दी है। बिल को राजभवन की मंजूरी मिलने के बाद अब जन सेवकों के वेतन भत्तों में करीब दोगुना तक बढ़ोतरी हो जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि राजभवन ने बिना कोई सवाल उठाए उसे पास कर सरकार को वापस भेज दिया। इस बढ़ोत्तरी को लेकर पब्लिक में जबरदस्त नाराजगी थी। बिल विधानसभा से पास होने के बाद करीब एक महीने से राज्यपाल की मंजूरी के लिए राजभवन में अटका हुआ था। बीते 8 अप्रैल को विधानसभा में विधायकों और मंत्रियों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी का विधेयक सर्वसम्मति से पास हो गया था। इस बिल का न भाजपा और न ही कांग्रेस ने विरोध किया।
इस बिल पर न कोई चर्चा हुई और न बहस। महज कुछ मिनटों में बिना शोर शराबे के पास हए वेतन भत्तों के इस बिल के पास होने के बाद प्रदेश भर में आम लोगों और विभिन्न कर्मचारी एवं पेंशनर्स संगठनों ने नाराजगी व्यक्त की थी। लोगों का कहना था कि जन सेवा के नाम पर अपनी सेवा करने के लिए विधायक बिना किसी विवाद के ऐसे बिल पास करा रहे हैं।
अब कितना हो गया विधायकों का वेतन भत्ता
आम लोगों की नाराजगी के बीच राजभवन ने बिल पर अपनी मुहर लगा दी।
लोगों का यहां तक कहना था कि जब प्रदेश पर हजारों करोड़ रुपये का उधार है और तमाम विकास योजनाएं सिर्फ वित्तीय संकट की वजह से अधूरी हैं, ऐसे में विधायकों को अपना वेतन बढ़ाने की क्या जरूरत थी। हालांकि, आम लोगों की नाराजगी के बीच राजभवन ने बिल पर अपनी मुहर लगा दी।
विधेयक के पास होने के बाद अब विधायकों का वेतन 30000 से बढ़कर 55 हजार रुपये प्रति महीना हो गया है। इसके साथ ही दैनिक भत्ता 1500 से बढ़कर 1800 रुपये, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 60 हजार से बढ़कर 90 हजार रुपये प्रति माह, कंप्यूटर ऑपरेटर भत्ता 12
हजार से बढ़ कर 15 हजार प्रति माह हो जाएगा। फ्री ट्रांजिट सुविधा के कारण होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये और एडवांस की सीमा को दस हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये हो गई।
पूर्व विधायकों की पेंशन भी 22 हजार रुपये से बढ़कर 28 हजार रुपये प्रति महीने हो गई है। वहीं, मुफ्त यात्रा सुविधा के कारण होने वाले खर्चों की प्रतिपूर्ति के लिए सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर सवा लाख रुपये कर दिया गया है।
पेंशन में पहले कार्यकाल की अवधि के अतिरिक्त हर साल के लिए अतिरिक्त पेंशन को पांच सौ रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया है।