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राज्यपाल बोले- आश्रमों, गृहों की नियमित निगरानी की जरूरत

Wed, 13 Sep 2017 05:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राज्य बाल कल्याण परिषद के संचालित किए जा रहे विभिन्न आश्रमों और बाल गृहों के नियमित निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि देश के कुछ संस्थानों में अप्रत्याशित घटनाओं के मद्देनजर हर आश्रम में सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए।
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राज्य कल्याण परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने ये दिशा-निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी मौजूद रहे। राज्यपाल ने कहा कि बच्चों की मनोदशा को बेहतर समझने के लिए स्थानीय समिति में एक मनोचिकित्सक होना चाहिए।

परिषद के संचालित प्रत्येक आश्रमों में परामर्श की विशेष सुविधा और निगरानी सुनिश्चित बनाई जानी चाहिए। उन्होंने आश्रमों में रहे रहे बच्चों के प्रति गंभीरता एवं मानवीयता बनाए रखने की अपील की। कहा कि ऐसे केंद्रों की देखरेख को व प्रशिक्षित व्यक्ति तैनात होने चाहिए। कहा कि अधिकांश अपराध एवं दुर्घटनाएं नशे के कारण होती हैं, जिन पर अंकुश लगाने की जरूरत है।
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सीएम बोले- अनुदान दे रही सरकार

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि सरकार 308 बच्चों वाले बाल एवं बालिका आश्रम के संचालन के लिए परिषद को अनुदान दे रही है। शिमला के पास ढली में विशेष स्कूल के दिव्यांग बच्चों के लिए 805.48 लाख से निर्माणाधीन भवन के निर्माण कार्य में तेजी लाने के अधिकारियों को निर्देश दिए। कहा कि कांगड़ा के गरली में बालिका आश्रम भवन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है।

परिषद कामकाजी महिलाओं के 0.6 आयु वर्ग के बच्चों के लिए राज्य में 42 शिशु सदन चला रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि राज्य में बेसहारा, निराश्रित तथा दिव्यांग बच्चों को भोजन तथा अन्य सुविधाएं देने के लिए 29 बाल-बालिका गृह एक संप्रेक्षण गृह एवं विशेष गृह तथा तीन खुले आश्रम संचालित किए जा रहे हैं। 

विशेष बच्चों के लिए 9 बाल-बालिका आश्रम एवं स्कूल तथा शिशु गृह संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में इन गृहों में 1208 आश्रय ले रहे हैं। राज्य बाल कल्याण परिषद की महासचिव राजकुमारी सोनी ने भी सुझाव दिए। शिक्षा सचिव अभिषेक जैन, राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा, बाल एवं महिला विकास विभाग के निदेशक मानसी सहाय ठाकुर आदि मौजूद रहे।
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