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'शिक्षकों की अनदेखी कर सत्ता में नहीं आ सकता कोई भी दल'

Wed, 13 Sep 2017 04:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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विधानसभा चुनाव से ऐन पहले राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को शिमला में प्रेस वार्ता कर प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि राज्य में शिक्षकों की अनदेखी कर कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में नहीं आ सकता है। 
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शिक्षकों की मांगों को जो भी राजनीतिक दल अपने एजेंडे में शामिल करेगा, उसे ही विस चुनाव में वोट देने को संघ व्हिप जारी करेगा। कहा कि शिक्षा विभाग प्रदेश में सबसे अधिक कर्मचारियों वाला विभाग है। 

संघ ने मुख्यमंत्री पर झूठे बयान देने का आरोप भी लगाया। कहा कि बीते साल संघ के राज्यस्तरीय अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि आए मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के लिए अलग से जेसीसी करवाने की घोषणा की थी। इसको लेकर दो बार मुख्यमंत्री कार्यालय से फाइल गुम हो गई है।
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सीएम को गुमराह कर रहे हैं अफसर

मुख्यमंत्री ऑफिस में बैठे रिटायर्ड अफसर सरकार की छवि को धूमिल करने का काम कर रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद भी नौकरी कर रहे ये अफसर सीएम को गुमराह कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि शिक्षा मंत्री के नाते मुख्यमंत्री ने बीते पांच साल के दौरान किसी भी शिक्षक संघ के साथ एक बार भी बैठक नहीं की है।

शिक्षकों की अनदेखी कर सरकार रिपीट नहीं हो सकती है। शिक्षकों को वेतन वृद्धि और अन्य लाभ देने के लिए सरकार वित्तीय संकट का हवाला देती है, जबकि मुख्य संसदीय सचिवों, निगमों-बोर्डों में चेयरमैन और सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिवों की फौज खड़ी कर दी गई है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन लोगों पर पैसा खर्च करने को बजट कहां से आ रहा है? 

उन्होंने कहा कि 4-9-14 का लाभ, सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने और साल 2003 के बाद नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में लाने सहित कई अन्य मांगों को बीते लंबे समय से संघ उठाता आ रहा है। प्रेस वार्ता में अरुण गुलेरिया, कविता विजलान, महावीर कैंथला, रमन कुमार, वीरेंद्र कुमार, मंगत चौहान और इंदु ठाकुर भी मौजूद रहे।
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नए स्कूल खोलना वोट बैंक की राजनीति

राजकीय अध्यापक संघ ने प्रदेश में नए स्कूल खोले जाने को वोट बैंक की राजनीति बताया। कहा कि बिना मूलभूत सुविधाओं, बिना स्टाफ के स्कूल खोलकर सरकार जनता को भ्रमित कर रही है। 

कोर्ट केसिस के लिए दोहरा मापदंड
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कोर्ट से आने वाले विभिन्न फैसलों को लेकर सरकार का दोहरा मापदंड है। जिन मामलों में कर्मियों के वित्तीय लाभ रोकने होते हैं, वहां कोर्ट का हवाला दिया जाता है। जो मामले कर्मियों के हित में होते हैं, उन्हें लागू नहीं किया जाता।
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