राजकुमार को मलाल है कि वह बेटे से आखिरी बार नहीं मिल पाए। बीते सोमवार को सुबह मां से मिलकर ही विशाल हिमाचल के लिए रवाना हो गया था। गरीबी में पला विशाल सातवीं तक ही पढ़ाई कर पाया था।
मैं नी करने सैन, मैनूं मुंडा वेखन देओ...। यह शब्द इकलौते बेटे विशाल (18) की मौत के गम में डूबे दिव्यांग पिता राजकुमार ने क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के शव गृह के बाहर कहे। रोते-बिलखते हुए राजकुमार ने अपना दर्द बयां किया।
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उन्होंने कहा कि बेटा नई बाइक पर माता रानी के दर्शन करने की बात करता था। इसलिए चार माह पहले ही बेटे के लिए बाइक ली थी। अभी तक बैंक लोन की तीन किस्तें ही भरी थीं। बेटे के लिए मोबाइल भी लिया था। राजकुमार को मलाल है कि वह बेटे से आखिरी बार नहीं मिल पाए।
बीते सोमवार को सुबह मां से मिलकर ही विशाल हिमाचल के लिए रवाना हो गया था। गरीबी में पला विशाल सातवीं तक ही पढ़ाई कर पाया था। वह होटल में वेटर का काम करता था।
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राजकुुमार ने बताया कि वह चार बच्चों को पहले ही खो चुके हैं। इन सभी की मौत बचपन में ही हो चुकी है। अब बुढ़ापे के एकमात्र सहारे विशाल को भी खो दिया है। बातचीत करते हुए राजकुमार भावुक हो गए और रोते हुए बोले - हुण रब दा ही सहारा है।