संघ के प्रदेश महासचिव रमेश कमल ने कहा कि जिन मार्गों पर कानून के अनुसार रूट परमिट जरूरी हैं, वहां निगम की इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी वैध परमिट के बाद ही होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निजी बस ऑपरेटर परमिट के साथ विभिन्न कर और शुल्क अदा करते हैं। ऐसे में उनके परमिट वाले मार्गों पर एचआरटीसी की बसें समानांतर चलने से निजी ऑपरेटरों की आय प्रभावित हो रही है। संघ ने सरकारी और निजी परिवहन सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम लागू करने की मांग की है। रमेश कमल ने चेतावनी दी कि यदि जिन मार्गों पर परमिट आवश्यक है, वहां बिना वैध परमिट इलेक्ट्रिक बसों का संचालन जारी रहा तो संघ अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। एचआरटीसी के डीएम शिमला देवासेन नेगी ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों को परमिट में छूट दी गई है। एचआरटीसी की बसें आवश्यक दस्तावेजों के साथ चल रही हैं। ब्यूरो