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यहां है वनस्पतियों का दुर्लभ खजाना, जानना नहीं चाहेंगे

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दुनिया के 58 देशों की वनस्पतियों का एक जीन बैंक शिमला में बनाया गया है। इस बैंक में 15,514 किस्मों की वनस्पतियां एकत्रित की गई हैं।
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ये 50 से अधिक अनाजों, दलहनों व फल देने वाले पौधों आदि की हैं। यह बैंक करीब 90 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के राष्ट्रीय पादप आनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो के क्षेत्रीय केंद्र शिमला में तैयार किया गया है।

इस बैंक के दो हिस्से हैं। एक भाग में बंद कमरे में सीड बैंक है। इसमें सात डिग्री तापमान और 35 प्रतिशत रिलेटिव ह्यूमिडिटी पर अनाजों, दलहनों आदि के बीज पैकेटों में रखे गए हैं।
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इन देशों की वनस्पतियों से बना बैंक

भारत, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, बोलिविया, ब्राजील, बुल्गारिया, कोलंबिया, क्यूबा, चेक रिपब्लिक, इक्वेडोर, जर्मनी, ग्वाटेमाला, हॉलैंड, होंडुरस, हंगरी, इजराइल, लाइबेरिया, मैक्सिको, नेपाल, पेरू, रोमानिया, रूस, स्लोवाकिया, स्पेन, स्वीडन, ताईवान, तुर्की, यूके, अमेरिका, जांबिया और जिम्बावे।

ये हैं फायदे
इस जीन बैंक से अच्छी एवं उपयोगी किस्मों को फील्ड में किसानों को उगाने के लिए दिया जा रहा है। ब्यूरो इसके लिए समय-समय पर फील्ड में शिविर भी लगा रहा है।

अगर कहीं ये किस्में लुप्त भी हो जाएं तो ब्यूरो के पास संरक्षित रहेंगी। किसानों के अलावा इसका लाभ कृषि-बागवानी वैज्ञानिकों को भी होगा। वे किसी भी तरह के शोध के लिए इन्हें प्राप्त कर सकेंगे। इस बैंक में 15,514 किस्मों को एकत्र करने में करीब 50 साल लग गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों की प्रमुख खाद्य वनस्पतियों का ये जीन बैंक दो हिस्सों में बंटा हैं।

राष्ट्रीय पादप आनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो शिमला के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. जेसी राणा ने कहा कि बंद कमरे में रखे गए बीज दशकों तक सुरक्षित रहते हैं। फील्ड में पेड़-पौधों के रूप में भी वनस्पतियों का संरक्षण किया गया है।
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