सड़क के लिए ग्रामीणों ने लड़ी लंबी लड़ाई
वहीं गांव के दशकों बाद करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी इस सड़क से जुड़ने और बस पहुंचने पर ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सड़क की खुशी में ग्रामीण मुख्य अतिथि के साथ नाटियों पर जमकर झूमे। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ रजनीश किमटा व अधिकारियों का स्वागत किया। गांव के लिए वर्तमान में कोविड काल में बना कच्चा संकरा एंबुलेंस रोड है, जो बारिश होने की स्थिति में बार-बार बंद हो जाता है। बरसात में तो इस मार्ग से आवाजाही करना जान जोखिम में डालने जैसा है। लेकिन अब मुख्य मार्ग से गांव के लिए बस योग्य सड़क बनने से लोगों की परेशानी दूर हुई है। लोकनिर्माण विभाग की ओर से तैयार इस सड़क को मंजूर करवाने के लिए गाैंचा वासियों को लंबा संघर्ष करना पड़ा है। करीब 25 वर्षों से ग्रामीण सड़क के लिए विभिन्न सरकारों से गुहार लगाते रहे। ग्रामीणों ने अपनी जेब से पैसे खर्च कर सड़क के लिए एफसीए की मंजूरी लेने के लिए देहरादून के भी कई चक्कर काटे। आखिरकार अब मेहनत रंग लाई है और गांव जीवन रेखा कही जाने वाली सड़क से जुड़ गया है।
अगले दो साल में बचे हुए गांव भी सड़क से जुड़ेंगे: रजनीश
इस दाैरान रजनीश किमटा कहा कि सड़कें हमारी जीवन रेखाएं हैं, आज भी चाैपाल क्षेत्र में बहुत से गांव सड़क सुविधा से वंचित हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें बनाना बहुत कठिन काम है। फिर भी पिछले कुछ समय से लोगों में जागरूकता आई है। सरकार की पूरी कोशिश रहेगी कि अगले दो साल में चाैपाल क्षेत्र के बचे हुए गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि 2026 तक गाैंचा से गयाहं गांव तक सड़क का कार्य पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गाैंचा सड़क को आने वाले वर्षों में पक्का किया जाएगा। साथ ही बाया भराणू से बस सेवा शुरू करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। सड़क लोकार्पण के दौरान उपमंडल अधिकारी चौपाल, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी सुनील शर्मा, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि, एचआरटीसी, पुलिस सहित अन्य विभागों के कर्मचारी-अधिकारी व ग्रामीण माैजूद रहे।