यह पहली बार नहीं है जब गैस रिसाव के कारण कामगारों की जान से खिलवाड़ हुआ है। इससे पहले भी औद्योगिक नगर बद्दी और परवाणू में गैस रिसाव के कारण बड़े बड़े हादसे होने से टले हैं। लेकिन अप्रशिक्षित हाथों में गैस हैंडलिंग करवाकर श्रमिकों की जान जोखिम में डालने पर न विभाग और न प्रशासन अंकुश लगाने में नाकाम रहा है। वहीं मौके पर आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए न तो कामगारों को मास्क और न ही अन्य सुरक्षा उपकरण मुहैया थे।
शनिवार को सेक्टर-2 में गैस रिसाव हादसा अप्रशिक्षित कामगारों की देन है। यह हाइड्रोजन पैराक्साइड गैस एक साधारण पंप से ट्रांसफर की जा रही थी। हालांकि श्रमिक इसे रूटीन का काम बता रहे हैं। लेकिन, यह कितना घातक हो सकता था यह उन्हें पता भी नहीं था। बार-बार हो रही इन घटनाओं के बाद भी ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से उद्योगों में कामगारों को ठूंसा जा रहा है।
न तो इन्हें गैस स्टोर करने का प्रशिक्षण हासिल होता है और न ही गैस को शिफ्ट करते वक्त एहतियात बरतने की जानकारी होती है। हलकी से लापरवाही कई लोगों की जान जोखिम में डाल दे, इसका अंदाजा शायद इन कामगारों को भी नहीं होता जो गैस को शिफ्ट करते हैं।