कुल्लू जिला में लहसुन की फसल तैयार हो गई है। लगघाटी में लहसुन निकालने में जुटे किसान परिवार।
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जिला कुल्लू में लहसुन की फसल तैयार हो गई है। किसान खेतों में लहसुन निकालने में जुट गए हैं। अभी बाहरी राज्यों का लहसुन देश की विभिन्न मंडियों में पहुंच रहा था। प्रदेश के निचले क्षेत्रों से लहसुन आजादपुर सब्जी मंडी दिल्ली में भेजा जा रहा है। किसानों को अच्छा दाम मिल रहा है। अब कुल्लू घाटी का लहसुन भी तैयार हो गया है। यह मंडियों में दस्तक देने के लिए तैयार है। किसान इन दिनों खेतों से लहसुन निकालने में व्यस्त हैं। कुछ इलाकों में लहसुन निकालने में सप्ताह भर का समय लग सकता है।
घाटी के किसानों अमित, यशपाल, सुरेश, रितेश आदि ने कहा कि इस साल लहसुन के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। कुछ सालों से किसान लहसुन की खेती को बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। कुल्लू का लहसुन अन्य राज्यों की तुलना में अधिक टिकाऊ होता है। ऐसे में इसकी मांग अधिक रहती है।
जिला कुल्लू में लहसुन का करोड़ों का कारोबार होता है। कुल्लू की लगघाटी, महाराजा क्षेत्र, खराहल घाटी, सैंज, बंजार सहित सेउबाग, काईस, बंदरोल, थरमाण आदि क्षेत्रों में किसान लहसुन को उगाते हैं। जिला कुल्लू के लहसुन की मांग दक्षिण भारत सहित विदेशों में अधिक रहती है।
लहसुन उत्पादन में प्रदेश में दूसरे नंबर पर कुल्लू
जिला कुल्लू में करीब 1500 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती हो रही है। प्रदेश में सिरमौर लहसुन के उत्पादन में पहले स्थान पर है, जबकि जिला कुल्लू उत्पादन के लिहाज से दूसरे स्थान पर है। हिमाचल के लहसुन की सबसे ज्यादा मांग दक्षिण भारत के राज्यों में रहती है। इसके अलावा विदेश में भी लहसुन की मांग रहती है।
इस बार लहसुन के अच्छे दाम मिल रहे हैं। लहसुन की खेती से कुल्लू जिले के किसानों की आर्थिकी मजबूत हो रही है। जिला कुल्लू में करीब 13697 टन लहसुन का उत्पादन होता है-
सुशील शर्मा, कृषि उपनिदेशक, कुल्लू