शहर की मुरारी मार्केट में चल रहे फिलफोट फोरम अभिनय-2014 में गुजरात के विजुअल आर्ट्स मांडवी ने ‘तोरवार’ नाटक का मंचन कर खूब वाहवाही लूटी। इसके माध्यम से दर्शाया गया कि यदि बच्चों का की सही परवरिश न हो तो वे घातक बन सकते हैं।
दूसरी सांस्कृतिक संध्या में चार नाटकों का मंचन किया गया। तोरवार नाटक अंग्रेज नाटक कार शेफर की ओर से वर्ष 1977 में लिखा गया। इसका नाम इक्वास है। तोरवार घोडे़ का नाम था।
रोहन मोता, डा. देसाई के रूप में मोहम्मद असहरा और मालती के रूप में हरिल जोशी ने अपने जानदार अभिनय से नाटक को सजाया। नाटक का निर्देशन डा. राजेश बासिया ने किया। वहीं, धनलक्ष्मी संगीत विद्यालय असम की ओर से ‘समयर समध्वनि’ मंचित किया गया।
नाटक में दर्शाया गया कि किस प्रकार हमारे समाज में भ्रष्टाचार अमानवता, दहेज उत्पीड़न की समस्याएं सामने आ रही हैं। यूनाइटेड आर्ट पटियाला की ओर से प्रस्तुत सुशील कुमार सिंह की ओर से लिखित नाटक ‘सिहांसन खाली है’ तीसरी प्रस्तुति रही। इसे बीडी गौतम ने निर्देशित किया था।
अंतिम नाटक उमंग कल्चर व वेलफेयर सोसाइटी सोलन के नाटक ‘अदिति’ में बेटी के महत्व को दर्शाया गया। बताया गया कि बेटी बोझ नहीं, दो कुलों का नाम रोशन करने वाली है।
इसमें समाज की सोच बदलने पर जोर दिया गया। मनोज शर्मा के निर्देशित इस नाटक में दीनानाथ के रूप में दिनेश वासिष्ठ व अदिति के रूप में अंबिका कमल ने अभिनय किया। फिलफोट फोरम अभिनय-2014 में देश भर से विभिन्न राज्यों के 700 कलाकार प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।