कम कैपेसिटी के साथ चलाया जा रहा प्लांट, व्यर्थ पदार्थ फेंकने के लिए मंगवाए हैं अलग से टैंकर
गिरि में नहीं फेंका जाएगा तरल पदार्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन और प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (एचपीएमसी) का ठियोग के पराला में स्थित फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट दस दिन बंद रहने के बाद दोबारा शुरू हो गया है।
गिरि खड्ड में इस प्लांट का व्यर्थ तरल पदार्थ फेंका गया था। जल शक्ति विभाग को ठियोग और मतियाना के लिए पानी की आपूर्ति रोकनी पड़ी थी। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जुर्माना लगाया था, जिसके बाद एचपीएमसी ने कुछ समय तक इस प्लांट को बंद कर दिया है। अभी इसमें दोबारा से सेब क्रश करना शुरू कर दिया गया है। हालांकि इसे अभी शुरुआत में कम कैपेसिटी के साथ चलाया जा रहा है। पराला फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट की 200 मीट्रिक टन की कैपेसिटी है, लेकिन अभी इसे 90 से 100 मीट्रिक टन कैपेसिटी के साथ चलाया जा रहा है। अब इसका व्यर्थ तरल पदार्थ गिरि खड्ड में नहीं फेंका जा रहा है। इसके लिए अलग से टैंकर मंगवाए गए हैं। इनमें व्यर्थ पदार्थ को भरकर पराला से करीब 24 किलोमीटर दूर जाकर फेंका जा रहा है। इसके अलावा स्थानीय लोगों को दिया जा रहा है, जो इसका प्रयोग खेतों में कर रहे हैं।
इनसेट
कम सेब से ही ज्यादा एप्पल कंस्ट्रेट बनाता है पराला प्लांट
पराला फ्रूट प्रोसिंग प्लांट में जरोल और परामाणू फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट के मुकाबले कम किलो सेब में एक लीटर एप्पल कंस्ट्रेट बनाकर तैयार किया जाता है। जरोल प्लांट में 12 किलो और परावाणू में 11.7 किलो सेब से एक लीटर एप्पल कंस्ट्रेट बनाकर तैयार किया जाता है। पराला फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट में 8.5 किलो सेब से ही एक लीटर एप्पल कंस्ट्रेट तैयार किया जाता है। पराला में यह अभी नया प्लांट बना है इसमें दोनों प्लांटों के मुकाबले क्रशिंग की मशीनें ज्यादा अच्छी है।
कोट्स
पराला फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट दस दिन बंद रहने के बाद दोबारा शुरू कर दिया गया है। प्लांट से ज्यादा व्यर्थ बाहर न निकले इसके लिए इसे अभी कम कैपेसिटी पर चलाया जा रहा है। हालांकि प्लांट से कोई भी केमिकल वाला व्यर्थ नहीं निकलता। -सुदेश कुमार मोक्टा, प्रबंध निदेशक, एचपीएमसी