कहानीकार व उपन्यासकार यशपाल को भारत सरकार ने वर्ष 1970 में पद्मभूषण से नवाजा। सरकार ने यशपाल की स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया। यशपाल के जन्मदिवस पर हर साल राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन और संगोष्ठी का आयोजन करती है। यशपाल के पुत्र आनंद पिछले कई सालों से जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से अपने पिता के पैतृक गांव का राजस्व रिकॉर्ड लेने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अभी तक इसमें सफलता नहीं मिल पाई है।
जिला राजस्व अधिकारी पवन कुमार शर्मा ने बताया कि यशपाल के बेटे आनंद गत दिवस हमीरपुर कार्यालय आए थे। उन्होंने रिकॉर्ड की मांग की है। वर्ष 1968-69 की जमाबंदी में मौजा भूंपल के टीका लुदरयाल में यशपाल के पिता के नाम 5 कनाल 11 मरले जमीन दर्ज है। लेकिन वर्ष 1977 में यह जमीन काश्तकार के नाम मुजारे में चली गई है।
ब्रिटिश वाइसराय लार्ड इर्विन की रेलगाड़ी को बम विस्फोट से उड़ाया
यशपाल का जन्म 3 दिसंबर 1903 को फिरोजपुर, पंजाब में हुआ था। उनके माता-पिता के परिवार और उनके पूर्वजों हमीरपुर जिला के वासी थे। 1929 में उन्होंने ब्रिटिश वाइसराय लार्ड इर्विन की रेलगाड़ी के नीचे बम विस्फोट किया था। यशपाल को जब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई तब वे सिर्फ 28 वर्ष के थे। वर्ष 1937 में यशपाल को जेल से मुक्त तो कर दिया गया। लेकिन उनके पंजाब प्रांत जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
लखनऊ जेल से रिहाई के बाद यशपाल ने संयुक्त प्रांत की राजधानी लखनऊ में ही बस जाने का निर्णय ले लिया था। यशपाल का निधन 26 दिसंबर 1976 को अपने संस्मरणों सिंहावलोकन का चौथा भाग लिखते समय हुआ था। नादौन में यशपाल साहित्य सदन और पुस्तकालय है। भारत सरकार ने वर्ष 1970 में उन्हें पद्मभूषण से नवाजा गया। सरकार ने यशपाल की स्मृति में डाक टिकट भी जारी किया। यशपाल के जन्मदिवस पर हर साल राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन और संगोष्ठी का आयोजन करती है।