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हिमाचल में गरीब छात्रों के लिए सीएम वीरभद्र ने की बड़ी घोषणा

Tue, 11 Oct 2016 10:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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डॉक्टर बनने की ख्वाहिश रखने वाले हिमाचल के गरीब परिवारों के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बड़ी घोषणा की है। ये विद्यार्थी प्रदेश के किसी भी सरकारी कॉलेज में मेडिकल शिक्षा की मुफ्त पढ़ाई कर सकेंगे। सोमवार को सूबे के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल(आईजीएमसी) के स्वर्ण जयंती समारोह में सीएम ने यह घोषणा की। 
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उन्होंने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे (बीपीएल) और आईआरडीपी परिवारों के विद्यार्थियों को सरकार मुफ्त मेडिकल शिक्षा दिलाएगी। उन्होंने हिमाचल में मेडिकल विश्वविद्यालय खोलने के लिए अगले विधानसभा सत्र में विधेयक लाने का भी एलान किया। सीएम ने कहा कि राज्य में तीन नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। 

नाहन मेडिकल कॉलेज में काम शुरू हो गया है। अगले सत्र से हमीरपुर और चंबा मेडिकल कॉलेज भी शुरू हो जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान आईजीएमसी के विद्यार्थियों ने सीएम से फीस स्ट्रक्चर का मामला उठाया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को आश्वासन दिया कि जांच कराकर इस मसले का जल्द समाधान निकाला जाएगा। 
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इस अवसर पर सीएम ने आईजीएमसी के संस्थापक शिक्षकों और 1966 के पहले बैच के प्राचार्य, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि इस कॉलेज ने अपने 50 साल के सफर में कई ऊंचाइयां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि देश के 77,000 डॉक्टर अमेरिका में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कुछ डॉक्टर आईजीएमसी से पास आउट और यहां सेवाएं भी दे चुके हैं। 

तीन मेडिकल कॉलेजों में 100-100 सीटें
वर्तमान में प्रदेश में एमबीबीएस की 100-100 सीटों वाले तीन सरकारी मेडिकल कॉलेज चल रहे हैं। इनमें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के अलावा डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा और नाहन मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। आने वाले सत्र में चंबा मेडिकल कॉलेज और हाल ही में राज्य द्वारा अधिग्रहीत किए गए ईएसआई मेडिकल कॉलेज मंडी शुरू हो सकते हैं। हमीरपुर में भी सौ सीट वाला एक कॉलेज भी प्रक्रिया में हैं। बिलासपुर में एम्स प्रस्तावित है। एम्स के अलावा इन सभी मेडिकल कॉलेजों में गरीब विद्यार्थी मुफ्त पढ़ाई कर सकेंगे।

चम्याणा कैंपस में शिफ्ट होगा आईजीएमसी का कैंसर अस्पताल
आईजीएमसी चम्याणा कैंपस में कैंसर अस्पताल शिफ्ट होगा। मरीजों की परेशानी न हो इसके लिए मुख्यमंत्री ने यह बात सोमवार को  गोल्डन जुबली के मौके पर एलुमनाई कार्यक्रम के दौरान कही। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कार्यक्रम समाप्ति के बाद मंच पर आकर यह एलान किया। 

आईजीएमसी में स्थापित कैंसर पीड़ितों मरीजों को यह सारी सुविधाएं चम्याणा में बनने वाले नए कैंपस में मिल सकेगी। चम्याणा के निकट भट्टाकुफर में 250 बीघा जमीन पर आईजीएमसी का दूसरा कैंपस स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीएमसी देश के बेहतरीन स्वास्थ्य संस्थानों में से एक है। 

यह संस्थान भविष्य में नयी ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। कार्यक्रम के दौरान कालेज प्राचार्य डॉ. अशोक शर्मा, चीफ को-ऑर्डिनेटर डॉ. अश्वनी सूद, डॉ. राजेश कश्यप, डॉ. संजीव शर्मा,  वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद, उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव, डेंटल कालेज प्राचार्य डॉ. आरपी लुथरा मौजूद रहे। 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फार्माकोलॉजी विभाग के डॉ. जोगिंद्र सिंह पठानिया की लिखी पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक में ग्यारह यूनिट में 101 चेप्टर है। आईजीएमसी के इतिहास में पहली मर्तबा  किसी डॉक्टर के द्वारा पुस्तक लिखी गई है। मुख्यमंत्री ने भी डॉक्टर के प्रयास के भूरि भूरि प्रशंसा की और कार्यक्रम के दौरान स्मारिका सुश्रुता का विमोचन किया।   डॉक्यूमेंट्री देखकर ताजा हुईं यादें
1966 से लेकर 2016 तक की डॉक्यूमेंट्री में पहले बैच से लेकर अब तक के बैच के डॉक्टर की यादों को यहां दिखाया गया। फिल्म में बताया कि कैसे एमबीबीएस छात्र पढ़ाई के बाद कॉलेज और बड़े ओहदों पर पहुंचे। डॉक्यूमेंट्री सुबह 11:27 से लेकर 11:44 मिनट तक दिखाई गई।

मुख्यमंत्री ने इन्हें किया सम्मानित
डॉ. डीएस पुरी, डा. राज पुरी, डा. आरके सक्सैना, डॉ. पीके गुप्ता, डॉ. आरएल गुप्ता, डॉ. एमएस दत्तल, डा. बीएल जैन, डॉ. पीसी सूद, डॉ. एसके बंसल, डॉ. वीना रानी परमार, डॉ. रमेश लुथर, डॉ. अशोक कुमार जडेजा, डॉ. पुष्प लता सूद, डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. ऊषा मोहन, डॉ. लेख राज शर्मा, डॉ. वीपी शर्मा, डॉ. संतोष मंजुमदार, डॉ. पलोम सोनी, डॉ. र्स्वण चौधरी, डॉ.    प्रदीमन बकया, डॉ. नीना कपूर, डॉ. सुदेश लखनपाल, डॉ. विजय शर्मा, डॉ. सुचेता मल्होत्रा, डॉ. धर्म चंद चमेल, डॉ. सुभाष चंद्र नेगी, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. सविता बैरी, डॉ. बीपी गुप्ता, डॉ. सतिंद्र कुमार गुप्ता, डॉ. रणधीर सिंह चंदेल, डॉ. आभा शर्मा, डॉ. डीएस रैना,  डॉ. रणदीप गुलेरिया, डॉ. विश्व मोहन कटोच, डॉ. राज बहादुर, डॉ. सुभाष वर्मा, डॉ. प्रकाश सिंह, डॉ. लेखराम    शर्मा, डॉ. डीजे दास गुप्ता, डा. ललिता बहल, डॉ. आशा गोयल, डॉ. आरसी शर्मा, डॉ. एचएल कपूर, डॉ. एलएस पाल, डॉ. सुरेंद्र कश्यप, डॉ. एसएस कौशल और डॉ. केपी चौधरी, डॉ. रितु  सरीन, डॉ. नरेंद्र कौशिक, डॉ. जेआर ठाकुर, डॉ. अनिल चौहान, डॉ. एचएम स्वामी, डॉ. गिरीश कुमार शर्मा, डॉ. टीएस महंत, डॉ. जगतराम और डॉ. एमआर डोगरा, डॉ. सुलक्षणा पुरी, डॉ.    नागेश वर्मा, डॉ. विनोद पाठक और डॉ. आरके वर्मा, वाई दर्शी, बिमला किरण प्रार्थी और दत्तवालिया जबकि अन्य में जोगिंद्र सिंह जिष्टूू,  प्रेम प्रकाश खतरी, किशोरी लाल असोतरा और हेमानंद को सम्मानित किया गया।
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