आईएफएस अफसरों के बाद अब प्रदेश के नाकारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसरों की सर्विस को रिव्यू की कवायद शुरू हो गई है। केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से केंद्रीय सेवा में कार्यरत अफसरों की सर्विस रिव्यू की व्यवस्था शुरू हुई। इस क्रम में अब हिमाचल के आईएएस अधिकारियों की सर्विस का रिव्यू होना है।
इस दौरान आईएएस अफसरों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) या परफार्मेंस असेसमेंट रिपोर्ट (पीएएस) पर फोकस रखा जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि अफसर कैसा काम कर रहे हैं और उन पर किसी तरह का आपराधिक मामला न हो। सूत्रों की मानें तो रिव्यू को कमेटी भी तैयार हो गई थी, लेकिन अब रिव्यू कमेटी के कुछ सदस्यों को बदलने की कार्रवाई चल रही है।
दरअसल, अभी तक मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता वाली रिव्यू कमेटी में हरियाणा के एक एसीएस एफसर के अलावा प्रदेश से अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्मिक तरुण श्रीधर, अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा, प्रधान सचिव जेसी शर्मा शामिल थे।
अब मनीषा नंदा और जेसी शर्मा की जगह दूसरे अफसरों को सदस्य बनाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों का कहना है कि मुख्य सचिव की मंजूरी के बाद नई कमेटी गठित होते ही अफसरों का रिव्यू हो जाएगा। खास बात यह है कि रिव्यू कमेटी जिस अफसर को रिटायर करने की सिफारिश करेगी उसकी रिटायरमेंट से पहले ही छुट्टी हो सकती है।
आपराधिक मामलों, छुट्टी वाले अफसर रडार पर
विभागीय सूत्रों के अनुसार रिव्यू के दौरान आपराधिक या विभागीय मामले झेल रहे अफसरों को परेशानी हो सकती है। रिव्यू में ऐसे अफसरों को केंद्रीय सेवाओं के लायक नहीं माना जाता। इसके अलावा लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे अफसर भी रिव्यू कमेटी की चपेट में आ सकते हैं।
दरअसल, हिमाचल के तीन वरिष्ठ आईएएस अफसर लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे हैं। पहले ही अफसरों की कमी से जूझ रहे हिमाचल को उनके न होने से मुश्किल हो रही थी। ऐसे में कमेटी अगर उनके खिलाफ सिफारिश करती है तो उन्हें भी वीआरएस लेना पड़ सकता है।