अब राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना में स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य जांचा जाएगा। नेशनल स्कूल हेल्थ मिशन को लगभग खत्म कर दिया गया है। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना में नवजात बच्चों की भी स्वास्थ्य जांच की जाएगी। फील्ड स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है।ट्रेंड स्टाफ घर-घर जाकर लगभग 30 प्रकार की बीमारियों की पहचान कर विभाग को रिपोर्ट देगा। इनमें जन्मजात बीमारियों के अलावा हार्ट, किडनी आदि की गंभीर बीमारियां शामिल हैं।
राष्ट्रीय बाल सुरक्षा अधिनियम में कार्यक्रम का संचालन बीएमओ स्तर पर होगा। वर्तमान में उपलब्ध स्टाफ से ही काम चलाया जाएगा। हालांकि, चिकित्सकों की कमी को देखते हुए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने निजी डॉक्टरों को जिम्मा सौंपने की योजना बनाई थी, लेकिन चिकित्सक नहीं मिले। इसके बाद आयुर्वेदिक डॉक्टरों को भी जिम्मा देने पर भी बात नहीं बनी।
अब आयुर्वेदिक और एलोपैथिक अस्पतालों में मौजूद स्टाफ के सहारे इस मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा। योजना में निशुल्क दवाइयों के साथ बड़े अस्पतालों में इलाज पर भी सरकार मदद देगी। बशर्ते, बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ रहा हो। विभाग के निदेशक डा. डीएस गुरंग ने बताया कि अब बच्चों का चेकअप राष्ट्रीय बाल सुरक्षा योजना में होगा। फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं।
नहीं हुआ बच्चों का चेकअप
स्टाफ की कमी से स्कूलों में बच्चों का चेकअप नहीं किया गया। आधा वित्त वर्ष गुजर गया है, लेकिन किसी भी जिले योजना शुरू नहीं हो पाई है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. दिनेश ठाकुर ने बताया कि फील्ड स्टाफ को ट्रेंड किया गया है। बीएमओ स्तर पर उपलब्ध चिकित्सक, हेल्थ वर्कर, दाइयां और आशा वर्कर इस कार्य को करेंगे।
इन बीमारियों की होगी पहचान
अब बाल सुरक्षा योजना में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की भी स्वास्थ्य जांच होगी। होम डिलीवरी होने पर भी घर-घर जाकर जांच होगी। बच्चों में होने वाले जन्मजात रोग के अलावा अनीमिया, विटामिन ए, डी की कमी, स्किन की बीमारियां, पेट में कीड़े, दांतों की समस्या, हार्ट की बीमारियां, सुनने की कमी, बोलने की कमी आदि 30 प्रकार की बीमारियों की पहचान की जाएगी।