सदर थाना शिमला में कारोबारी के खिलाफ बैंक की शिकायत पर केस दर्ज
जांच के लिए मौके पर पहुंची टीम को नहीं मिला सामान, गिरवी संपत्ति भी गायब मिली
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में भारतीय ओवरसीज बैंक की शिमला शाखा में फर्जी दस्तावेज देकर दो करोड़ रुपये का ऋण लेने का मामला सामने आया है। बैंक ने रामपुर के कारोबारी अभिजीत लाल पर फर्जी बिल और अन्य दस्तावेजों के आधार पर ऋण लेने का आरोप लगाया है।
बैंक की शिकायत पर सदर थाना शिमला में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 336(3), 340(2), 316(5) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस को दी शिकायत के अनुसार आरोपी कारोबारी अभिजीत लाल ने छह फरवरी 2023 को अपनी फर्म के लिए एक करोड़ रुपये की नकद साख सीमा और एक करोड़ रुपये का सावधि ऋण लिया था। आरोप है कि ऋण की राशि जारी करवाने के लिए कई आपूर्तिकर्ताओं के फर्जी बिल और दस्तावेज पेश किए गए। नकद साख सीमा से जुड़े दस्तावेजों में कपड़ा आपूर्तिकर्ताओं के नाम पर लाखों रुपये के बिल लगाए गए। इनमें पांच लाख रुपये, 20 लाख रुपये, 15 लाख रुपये और दस लाख रुपये की मांग वाले बिल शामिल हैं। बैंक के अनुसार संबंधित आपूर्तिकर्ताओं से भुगतान और सामान की आपूर्ति की पुष्टि नहीं मिली। सावधि ऋण से जुड़े दस्तावेजों में इलेक्ट्रॉनिक सामान और वातानुकूलन उपकरणों की खरीद भी जांच के घेरे में है। बैंक के अनुसार कई मामलों में मूल बिल जमा नहीं किए गए। एक आपूर्तिकर्ता ने 9.19 लाख रुपये की राशि उधारकर्ता के खाते में वापस किए जाने की जानकारी भी बैंक को दी।
दुकान बंद मिली, गिरवी माल भी नहीं मिला
बैंक के मुताबिक ऋण खाता अनर्जक परिसंपत्ति घोषित होने के बाद रामपुर स्थित दुकान की जांच की गई। बैंक के अधिकृत अधिकारी ने 22 अप्रैल को दुकान का निरीक्षण किया। उस समय दुकान बंद मिली। आसपास के दुकानदारों ने स्टॉक हटाए जाने की जानकारी दी। बैंक का आरोप है कि गिरवी रखा स्टॉक हटाए जाने के कारण उसका भौतिक सत्यापन नहीं हो सका। दुकान में बैंक के ऋण से खरीदे गए उपकरण, फर्नीचर और अन्य सामान भी नहीं मिले। बैंक के अनुसार कारोबारी ने दुकान और गोदाम में रखे स्टॉक की जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई। शिकायत में यह भी आरोप है कि कारोबारी ने बैंक की अनुमति के बिना दूसरे बैंकों में खाते संचालित किए। इन खातों से लेनदेन किए गए। बैंक के अनुसार ऋण राशि के वास्तविक उपयोग की पुष्टि के लिए मांगे गए उपयोग प्रमाणपत्र भी जमा नहीं किए गए। मामले में फर्जी पट्टा दस्तावेज सामने आने का भी आरोप है। गवाहों के हस्ताक्षर भी फर्जी होने की बात सामने आई है। बैंक का आरोप है कि इसी दस्तावेज को ऋण लेने के लिए इस्तेमाल किया गया। बैंक ने शिकायत में बताया है कि 26 अप्रैल 2026 तक कारोबारी से करीब 2.11 करोड़ रुपये की वसूली बाकी थी। इसमें ब्याज और कानूनी खर्च अलग हैं। बैंक का आरोप है कि गिरवी संपत्तियां भी हटाकर अज्ञात स्थान पर ले जाई गईं। मामले में बैंक पहले ही ऋण वसूली न्यायाधिकरण चंडीगढ़ में वसूली वाद दायर कर चुका है। पुलिस ने अब फर्जी दस्तावेजों, बिलों, ऋण राशि के इस्तेमाल और गिरवी संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है।