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Shimla News: पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर फोरलेन कंपनी को 5 लाख जुर्माना

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बिना सुरक्षा उपाय के घाटियों में मलबा फेंकने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई
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कंपनी को 24 अप्रैल को जारी किया था कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था लेकिन पर्याप्त रिटेनिंग स्ट्रक्चर उपल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) ने शिमला के कैथलीघाट से शकराला तक बन रहे फोरलेन के निर्माण कार्य में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनी को पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को यह जुर्माना राशि एक हफ्ते के भीतर अदा करनी होगी।

बोर्ड ने यह कार्रवाई जल प्रदूषण बचाव एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के उल्लंघन पर की है। बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि जमा न करने पर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रीय अधिकारी शिमला की 19 और 24 अप्रैल को की गई नियमित निरीक्षण रिपोर्ट में यह पाया गया कि निर्माण कार्य से निकला मलबा और सीएंडडी (निर्माण एवं ध्वंस) कचरा घाटियों की ओर बिना किसी सुरक्षा उपायों तथा रिटेनिंग स्ट्रक्चर के सीधे फेंका जा रहा है। यह स्थिति पुल नंबर 17, 12, 11, 7 और 6 के पास देखी गई। इस दौरान कंपनी को 24 अप्रैल को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था लेकिन पर्याप्त रिटेनिंग स्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं करवाए गए। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि बरसात के दौरान यह मलबा बहकर नजदीकी जल स्रोतों में पहुंच सकता है और पानी की गुणवत्ता को खराब कर सकता है।
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गौरतलब है कि कालका-शिमला फोरलेन परियोजना का बड़ा हिस्सा अश्वनी खड्ड के कैचमेंट एरिया में आता है जो हिमाचल की नौ प्रदूषित नदियों में शामिल है। एनजीटी की निगरानी में इस खड्ड के पानी की गुणवत्ता नियमित रूप से जांची जाती है। एनजीटी ने वर्ष 2013 में आदेश जारी कर साफ किया था कि किसी भी प्रकार का मलबा, सीवेज या अन्य अपशिष्ट नदियों या उनकी सहायक धाराओं में नहीं फेंका जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इस मामले में क्षेत्रीय अधिकारी की सिफारिश पर बोर्ड ने पांच स्थलों पर हुए उल्लंघन को गंभीर मानते हुए पांच लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाने का निर्णय लिया। अनुपालन न करने पर बोर्ड वाटर एक्ट 1974 के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई होगी। बोर्ड के सदस्य सचिव अनिल जोशी ने यह आदेश जारी किया है।
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