निर्माणकर्ता ने बिना ड्राइंग के अपनी समझ के अनुसार ही भवन का निर्माण किया था। बहरहाल, न्यायिक जांच पूरी होने के बाद अब यह रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है और इस पर अब राज्य सरकार की तरफ से फैसला लिया जाएगा। भवन की जांच के दौरान न्यायिक जांच समिति ने जिन पहलुओं पर फोकस किया उनमें मिट्टी व जमीन की स्थिति, भवन निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, भवन निर्माण में लगे समय, नेशनल हाईवे के नियम व नक्शा बना था या नहीं मुख्य बिंदू रहे हैं।
इनमें ज्यादातर बिंदुओं पर भवन खरा नहीं उतर पाया। जांच टीम ने भवन के नीचे की मिट्टी की जांच करवाई है। इसके अलावा भवन के अवशेष से मिले कंकरीट और पिलरों के भी माप लिए गए हैं। ज्यूडिशियल जांच अधिकारी एसडीएम रोहित राठौर ने बताया कि एक टीम बनाई गई थी। इस टीम की मदद से जांच पूरी की गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आए हैं उन्हें सरकार के सुपुर्द कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि भवन में बहुत सी खामियां पाई गई हैं। भवन का बेसमेंट चार मंजिल का भार झेलने लायक नहीं था। जमीन कच्ची थी जिसे भवन के फ्रंट पर बने कच्चे-पक्के सेप्टिक टैंक ने और कमजोर बना दिया। उन्होंने कहा कि अब रिपोर्ट पर सरकार को निर्णय लेना है। कुमारहट्टी में नाहन मार्ग पर 14 जुलाई को एक चार मंजिला भवन धराशायी हो गया था।
इस भवन में एक ढाबा चल रहा था। जहां असम रायफल के 30 जवान खाना खाने के लिए रूके थे। जिस समय यह जवान भवन में थे अचानक पूरा भवन जमींदोज हो गया और हादसे में 13 जवानों समेत ढाबा संचालक महिला की भी मौत हो गई। हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे और एसडीएम सोलन को जांच अधिकारी नियुक्त किया था।