पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कामकाज की अपनी अलग शैली रही है। इससे अफसर भी अच्छी तरह से परिचित रहे हैं। उनके मुख्यमंत्री रहते मंत्री सहित अन्य नेता भी उनके कामकाज के खासे कायल रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की हिमाचल प्रदेश की अफसरशाही पर मजबूत पकड़ थी। सत्ता में रहते वीरभद्र के दौरे के दौरान मौके पर सभी सरकारी विभागों के अफसर हाजिर रहते थे। वह किसी भी विभाग के अफसर को पुकार लेते थे। संबंधित क्षेत्र के विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा वह सचिवालय के अलावा मौके पर भी करते थे। यही कारण था कि वीरभद्र सिंह के दौरे से पहले अफसरशाही को मौके पर होमवर्क कर पहुंचना पड़ता था। अफसर किसी जानकारी के अभाव में पहुंचता था तो उसे चेतावनी देकर दोबारा उपस्थित रहने के लिए कहा जाता था।
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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कामकाज की अपनी अलग शैली रही है। इससे अफसर भी अच्छी तरह से परिचित रहे हैं। उनके मुख्यमंत्री रहते मंत्री सहित अन्य नेता भी उनके कामकाज के खासे कायल रहे हैं। पूर्व मंत्री हर्ष महाजन कहते हैं वीरभद्र सुबह छह बजे तैयार होकर बैठ जाते थे और रात जब तक कार्य पूर्ण न हो, वह सोते नहीं थे। वीरभद्र सिंह की एक खासियत यह भी थी कि बाबू की कलम से तैयार फाइल को विस्तार से पढ़ते थे।
इसके बाद फाइल पर अफसरशाही की नोटिंग पढ़कर खुद हस्ताक्षर करते थे। यही कारण था जो अफसरशाही पर उनकी मजबूत पकड़ रही। बताते हैं कि समयबद्ध विकास कार्य न कराने वाले अफसर हमेशा थर्राते रहे। उन्हें कई बार मौके पर लताड़ते भी रहे। मेहनती और काम के प्रति समर्पित अफसरों की वीरभद्र कद्र भी करते रहे हैं। ऐसे अफसर वीरभद्र के साथ काम करना पसंद भी करते थे।