राजनीतिक सफर के चलते ही शांता की उनसे मुलाकात हुई थी और बाद में दोनों शादी के सूत्र से बंध गए थे। वह काफी समय तक कन्या राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पालमपुर में शिक्षिका रहीं। शांता कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने रिटायरमेंट ले ली थी।
पति के साथ रोज करती करती थीं योग
संतोष अपने पति के साथ रोजाना सुबह उठकर करीब दो घंटे तक योग करती थीं। वह योग के कारण 83 साल की उम्र में भी काफी एक्टिव थीं।
पत्र में भेजे आंसुओं को शांता ने पहचाना था
1985 में देश में लगे आपातकालीन के चलते शांता कुमार को भी नाहन जेल में डाल दिया गया था। उनका बेटा बीमार था तो भी संतोष ने शांता को इस बारे में नहीं बताया था। उन्न्होंने जेल में बंद शांता को पत्र भेजा था। पत्र में टपके शैलजा के आंसुओं को पहचान लिया था, जबकि पत्र के अंदर संतोष शैलजा की लिखी पंक्तियां यादें अपने उजालों की रहने दो हमारे पास, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए..., जिसे पढ़कर शांता काफी भावुक हुए थे।