नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार की गुमराह करने वाली राजनीति का अब पर्दाफाश हो रहा है। सरकार ने निजी विवि की इंडोवमेंट फीस को जिस तरह घटाया है, वह सरकार की अवसरवादिता का स्पष्ट उदाहरण है।
पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश को शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र का हब बनाने के लिए कई कदम उठाए थे। लेकिन, उस समय कांग्रेस ने सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने के बजाए हिमाचल ऑन सेल जैसे नारे लगाए। भाजपा सरकार ने पहले निजी विवि खोले और इनकी गुणवत्ता के लिए रेगुलेटरी कमीशन भी बनाया।
निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए 5 करोड़ इंडोवमेंट फीस भी तय की। उस समय कांग्रेस ने नकारात्मक रवैया अपनाकर निजी विवि का खुलकर विरोध किया और अब सत्ता में आने के बाद उसी कांग्रेस सरकार ने इंडोवमेंट फीस घटाकर 3 करोड़ कर दी।
कांग्रेस सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिरकार सरकार अब क्यों निजी विश्वविद्यालय खोलना चाहती है? पूर्व मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेजों में घटी सीटों के लिए कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह प्रदेश सरकार की शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा का परिणाम है कि आज प्रदेश के 85 होनहार विद्यार्थी डॉक्टर बनने से वंचित होने की कगार पर हैं।
किसकी मिलीभगत से बने एडमिशन नियम?
धूमल ने तकनीकी शिक्षण संस्थानों में एडमिशन न होने के लिए भी कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। धूमल ने कहा कि सख्त नियमों के चलते आज हजारों छात्र अपने ही प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं।
उसी योग्यता के आधार पर उन्हें अन्य प्रदेशों में प्रवेश मिल रहा है। धूमल ने प्रदेश सरकार से सवाल पूछा कि जब ये छात्र शिक्षा ग्रहण करके आएंगे तो क्या उन्हें अपने राज्य में नौकरी का अधिकार नहीं होगा? ये किसकी मिलीभगत से हो रहा है?