ठूंड में कशमल की जड़ों का हो रहा बड़े पैमाने पर दोहन, सैकड़ों टन जड़े पहुंच रहीं अन्य राज्यों में
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। मशोबरा ब्लॉक की सतलाई पंचायत के ठूंड में इन दिनों कशमल की जड़ों का बड़े पैमाने पर दोहन हो रहा है। यहां ठेकेदार के मजदूर बाकायदा टेंट लगाकर डेरा जमाए हुए हैं। यह मजदूर कशमल की जड़ें उखाड़कर इकट्ठा कर रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि निजी जमीन के बाद सरकारी भूमि से भी इसे उखाड़ा जा रहा है।
मजूदरों को एक क्विंटल कशमल की जड़ों को उखाड़ने की एवज में एक हजार रुपये मेहनताना दिया जा रहा है। क्षेत्र में सैकड़ों टन के हिसाब से जंगली वनस्पति का दोहन किया जा रहा है जिस पर अब सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं। हर दस साल बाद किसानों को उनकी निजी जमीन से इस पौधे को काटने और बेचने की अनुमति वन विभाग देता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह कशमल की जड़ों का बड़े पैमाने पर दोहन हो रहा है उससे भविष्य में जंगली पौधे नष्ट हो सकते हैं। अब निजी जमीन के साथ सरकारी भूमि से कशमल के पौधों को उखाड़ा जा रहा है। लोगों का कहना है कि वन विभाग को इस पर निगरानी रखनी चाहिए। कशमल एक झाड़ीनुमा जंगली पौधा है जिसकी ऊंचाई 4 से 5 मीटर होती है। इसमें नीले रंग के छोटे दाने लगते हैं जो आयरन से भरपूर होते हैं।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. विश्वबंधु जोशी ने बताया कि कशमल एक औषधियुक्त पौधा है जिसका वनस्पति नाम बरबैरीज है। कशमल से आखों की दवा रसौंत बनाई जाती है। इसके अलावा इसकी जड़ें मधुमेह, पीलिया और बवासीर रोग में काफी लाभदायक होती है। खुले बाजार में कशमल की जड़ों की काफी मांग है और किसानों को अच्छी आय हो जाती है। वन कर्मी लब्बू राम ने बताया कि सिरमौर के ठेकेदार कशमल की जड़ें खरीद रहे हैं। 31 मार्च तक विभाग ने निजी भूमि से कशमल की जड़ों को निकालने की अनुमति दी है। यदि सरकारी भूमि से इसे निकाला जा रहा है तो ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी।