दरअसल, बंदरों के वर्मिन घोषित होने के बावजूद शिमला समेत कुल 38 तहसीलों व उप तहसीलों में सिर्फ पांच बंदरों के ही मारे जाने की आधिकारिक रूप से पुष्टि हुई है। चूंकि, विभाग ने बंदर मारने की जानकारी व उसके बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि देने की प्रक्रिया ही बेहद जटिल कर दी है।
ऐसे में लोग बंदर मारने से भी कतरा रहे हैं और अगर गलती से मार भी दें तो वह विभाग को जानकारी नहीं दे रहे। इसके अलावा धार्मिक आस्था भी बंदरों को मारने में आड़े आ रही है।
ऐसे में अब विभाग ने परंपरागत तरीका अपनाने की कोशिश शुरू की है। उधर, पीसीसीएफ आरसी कंग ने कहा कि जब तक आम लोगों की सहभागिता नहीं होगी, तब तक इस समस्या से पूरी तरह निजात पाना संभव नहीं है।