आसरंग लिप्पा कंडे में विभिन्न स्थानों पर कैमरे लगाकर वनों से होने वाली अवैध तस्करी और यहां पाई जाने वाली जड़ीबूटियां चुराने वालों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। लिप्पा आसरंग कंडे में पतीश, गुगल, चौरा, रतन जोत, जंगली लहसुन और अन्य बेशकीमती जड़ीबूटियां पाई जाती हैं। सांगला वैली के छितकुल कंडे में भी तीन कैमरों की मदद से वन्य प्राणी मंडल जानवरों की पहचान और अन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
मुख्य अरण्यपाल वन्यप्राणी दक्षिण सुशील कापटा ने बताया कि मई माह के दौरान सराहन वन्यप्राणी मंडल के स्टाफ और भारतीय वन्यप्राणी संस्थान देहरादून के रिसर्चर अंकिता भट्टाचार्य और निलांजन चटर्जी की संयुक्त टीम ने तत्कालीन डीएफओ कुणाल अंग्रिश के नेतृत्व मे सेंक्चुरी में 8 कैमरा ट्रैप लगाए थे।
इन्हीं में से एक कैमरे में लगभग 4000 मीटर की ऊंचाई पर यह शर्मिला जंतु कैद हुआ। उन्होंने कहा कि यह खोज हिम तेंदुए के नए प्राकृतिक प्रवासों का पता लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।