किसी भी विकास परियोजना के लिए जमीन देने से पूर्व वन विभाग वन संपदा की निशानदेही करता है। किरतपुर-नेरचौक हाईवे के लिए भी बाकायदा प्लान बनाया गया था, जिसमें निर्माण एजेंसी ने अपनी मर्जी के अनुसार बदल दिया है।
शिकायत मिलने के बाद वन विभाग ने जांच समिति गठित कर मामले की तहकीकात शुरू की थी। जांच में वन विभाग, राजस्व और भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के अधिकारी शामिल थे। जांच में पता चला है कि करीब आठ स्थानों में प्लान में बदलाव किया गया है।
जांच के बाद टीम ने आरडी नंबर और खसरा नंबर जारी कर बदले गए प्लान की रिपोर्ट तैयार की है। जो बदलाव किया गया है, वह भारत सरकार की मंजूरी के बिना है। वन विभाग ने नोटिस में अनुमति प्रमाण पत्र मांगा है।
ऐसा न करने पर जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। मामले में वन विभाग ने एफसीए एक्ट 1980 और सरकार को अंतिम शर्तों 26.10.2013 को जो अंतिम मंजूरी दी है, उसके तहत कार्रवाई की जाएगी।
डीएफओ सरोज भाई पटेल ने बताया कि जांच के दौरान भू-अधिग्रहण प्लान में बदलाव पाया गया है। जरूरी कार्रवाई की जा रही है। वन विभाग की जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार जिन नौ गांवों की भूमि को अनधिकृत
रूप से शामिल किया गया है, उनके पास से कुल 15 किलोमीटर लंबी सड़क बननी थी। एनएचएआई ने पौने चार किलोमीटर के क्षेत्र में प्लान के बाहर जाकर काम किया है। जबकि ऐसा करने से पूर्व भारत सरकार की ओर से अनुमति जरूरी है।