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हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप को लेकर दो बड़ी भविष्यवाणियां

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नेपाल से भी कहीं ताकतवर भूकंप फिर आ सकता है। यह भूकंप हिमालय के साथ साथ दुनिया के कई देशों में तबाही मचा सकता है। ऐसी भविष्यवाणी हिमाचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता बगलामुखी मंदिर में देवी ने की है।
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हाल ही में माता की पूजा-अर्चना के दौरान जब जाग (होम) का आयोजन किया गया तो भजन मंडली की स्वर लहरियों के बीच माता बगलामुखी ने अपने पुजारी के माध्यम से आने वाले भविष्य के बारे में बताया। मां ने देव वाणी के माध्यम से बताया कि आने वाला समय विकट परिस्थितियों से घिरा हुआ है। कहीं जलजला तो कहीं भयंकर सूखा पड़ेगा।

लोगों में धर्मिक आस्था के चलते हिमाचल जैसे शांत क्षेत्र में इसका अधिक प्रभाव नहीं पडे़गा। माता बगलामुखी का दस महाविद्याओं आठवां स्थान है तथा माता बगलामुखी शत्रुओं का विनाश करने वाली, मुकदमे में विजय दिलाने वाली और समाज कल्याण करने वाली देवी मानी गई है। माता कलयुग में चमत्कारी प्रभाव दिखाने वाली देवी मानी गई है।
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रशियन भू गर्भ वैज्ञानिक ने भी दी चेतावनी

वहीं, रशियन भू-गर्भ वैज्ञानिक वी कोस्वोकोव ने हिमाचल समेत विश्व के कई देशों में भूकंप को लेकर भविष्यवाणी की है। उन्होंने भारत की हिमालयन रेंज में स्थित हिमाचल प्रदेश में जनवरी 2016 तक 8 मैग्नीट्यूड तीव्रता वाला जलजला आने की आशंका जताई है।

मंडी का सुंदरनगर क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील है। ये शहर भूकंप का केंद्र भी हो सकता है। रशियन वैज्ञानिक की इस भविष्यवाणी को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने गंभीरता से लिया है। एनडीएमए की ओर से हिमाचल सरकार को भूकंप से होने वाले नुकसान से बचने के लिए सतर्क रहने के लिए कहा है।

एनडीएमए के पत्र पर राज्य सरकार ने जिला प्रशासन और स्कूलों में आपदा प्रबंधन की गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके आधार पर स्कूलों में भूकंप से बचने की गाइडलाइन और मॉक ड्रिल से छात्रों और आम लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

हिमाचल के स्वास्‍थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि वैसे तो भूकंप को लेकर भविष्यवाणियां सटीक नहीं रहतीं। एनडीएमए के हवाले से रूसी वैज्ञानिक की रिपोर्ट जरूर प्राप्त हुई है। उसके आधार पर स्कूलों को गाइडलाइन जारी की गई हैं। भूकंप आने की स्थिति में राहत एवं बचाव की हर स्तर पर तैयारी है। अलग आपदा फोर्स के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

जोन 4 और 5 में आता है हिमाचल

हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से जोन 4 और 5 में आता है। इसे संवेदनशील माना जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1905 में कांगड़ा में आए भूकंप में हिमाचल में 18 से 20 हजार लोगों की मौत हुई थी।

भूकंप के नजरिये से हिमाचल को हाई रिस्क की दो जोनों में बांटा गया है। एक सिस्मिक जोन चार है तो दूसरी जोन पांच है। जोन पांच को वेरी हाई डैमेज रिस्क जोन कहा जाता है जबकि जोन चार को हाई डैमेज रिस्क जोन। जोन तीन को मोडेरेट डैमेज रिस्क जोन और जोन दो लो डैमेज रिस्क जोन कहलाती है। देश के अधिकतर हिस्से या तो जोन दो में हैं या जोन तीन में।

लेकिन हिमाचल सहित समूचा हिमालयीय क्षेत्र जोन चार और पांच के तहत ही आता है। देश का जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक का हिस्सा खतरे की जद में है। भूकंप की दृष्टि से हिमाचल के चंबा, कुल्लू, कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, मंडी और बिलासपुर जिले के अधिकतर क्षेत्र जोन पांच में आते हैं। बाकी जिले लाहौल स्पीति, किन्नौर, शिमला, सोलन और सिरमौर को जोन चार में हैं।

सरकती है इंडियन प्लेट
विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय उपमहाद्वीप का बड़ी संख्या में भूकंप आने का इतिहास रहा है। इसका मुख्य कारण इंडियन प्लेट का अपने स्थान से सरकना है। यह साल दर साल करीब 47 एमएम की रफ्तार से एशिया के मध्य की ओर बढ़ रही है। इंडियन प्लेट में साउथ एशिया का एक बड़ा हिस्सा आता है।
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हिमाचल में कब कब मची तबाही

-कांगड़ा में 5.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया। इससे काफी भवनों में दरारें आई थीं।
-भरमौर और कांगड़ा क्षेत्र में 5.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया। इससे क्षेत्र में कई भवनों को नुकसान पहुंचा।
-कांगड़ा में रिक्टर स्केल पर 5.0 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया। इससे कुछ भवनों में दरारें आईं
-कुल्लू के सुल्तानपुर के निकट रहा 6.0 मैग्नीट्यूड के भूकंप का केंद्र। काफी नुकसान।
-कठुआ जिले में हिमाचल-जम्मू कश्मीर बॉर्डर पर था 6.0 मैग्नीट्यूड भूंकप का केंद्र।
-हिमाचल-जम्मू कश्मीर सीमा पर 6.0 मैग्नीट्यूड का भूचाल आया।
-हिमाचल-जम्मू बॉर्डर के निकट कठुआ जिले में रहा 6.0 मैग्नीट्यूड के भूकंप का केंद्र।
-हिमाचल के चंबा और जेएंडके के उधमपुर के बीच 6.0 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया।
-लाहौल स्पीति जिले में 6.0 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया। झटके पूरे प्रदेश में महसूस किए गए।
-हिमाचल के चंबा और जेएंडके के उधमपुर जिले में 6.0 मैग्नीट्यूड का भूचाल आया।
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