एनएफएसए, बीपीएल और अंत्योदय परिवारों को दोहरा झटका लगा है। इन परिवारों को अब अक्तूबर से डिपो में आटे की जगह गेहूं दिया जाएगा। जिला में एनएफएसए और बीपीएल सहित प्रायोरिटी हाउस होल्ड की संख्या तीन लाख 34 हजार है।
गेहूं मिलने के कारण इन परिवारों को अब दोबारा से आटा पिसवाने के लिए चक्कियों की ओर रुख करना होगा। सरकार की ओर से बीते दिनों ही इस बारे में जानकारी दी गई है। अब इन परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
बताते चलें कि एनएफएसए (नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट) और बीपीएल परिवारों को 18.800 ग्राम आटा और प्रायोरिटी हाउस होल्ड को 2.800 ग्राम आटा प्रति मेंबर दिया जाता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इन्हें पहले की तरह ही डिपो में गेहूं दिया जाएगा।
अप्रैल से मिल रहा था आटा
नोटबंदी के बाद उपभोक्ताओं को अप्रैल से आटा उपलब्ध करवाया जा रहा था। डिपो में गेहूं की जगह आटा मिलने के कारण इन परिवारों के लिए काफी हद तक राहत भी मिली थी। लेकिन फिर से गेहूं देने से इन उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
क्यों होगी परेशानी
इन परिवारों को गेहूं मिलने के कारण अब पहले की तरह चक्कियों में जाकर गेहूं की पिसाई करवानी होगी। गांवों में अभी तक कुछ जगहों में ही चक्कियां है। ऐसे में इन्हें दूर दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ेगा। गेहूं को पिसवाने के चक्कर में पचास से साठ रुपये खर्च करना पड़ेगा। यह उपभोक्ताओं को काफी महंगा पड़ेगा।