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उल्लंघन: ऑन गवर्नमेंट ड्यूटी लिखकर निजी टैक्सियों में नियमों की अनदेखी, सायरन और फ्लैशर का भी दुरुपयोग

Mon, 20 Apr 2026 10:19 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला सहित प्रदेशभर में निजी टैक्सियों में सरकारी लोगो के साथ फ्लैशर और सायरन का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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शिमला सहित प्रदेशभर के शहरी क्षेत्रों में विभिन्न विभागों की ओर से किराये पर ली गई निजी टैक्सियों में कायदे कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। निजी टैक्सियों पर      सरकारी लोगो के साथ फ्लैशर और सायरन का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। शिमला निवासी निशांत गुप्ता ने इस संबंध में परिवहन और गृह सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर गंभीर अनियमितताओं पर तुरंत कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

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पत्र में बताया गया है कि कई सरकारी अधिकारियों द्वारा किराये पर ली गईं निजी टैक्सियों पर एचपी गवर्नमेंट या ऑन एचपी गवर्नमेंट ड्यूटी जैसे बोर्ड और स्टिकर लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ वाहनों में लाल-नीली बत्ती (फ्लैशर) और सायरन का भी अवैध रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।

शिकायतकर्ता ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि किसी भी निजी वाहन पर सरकारी पहचान का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा सायरन का अनियंत्रित उपयोग ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के भी खिलाफ है, जिसमें केवल अधिकृत आपातकालीन वाहनों को ही इसकी अनुमति दी गई है।
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परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन  कड़ी कार्रवाई करें। उधर, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह केके पंत ने सरकारी विभागों की ओर से किराये पर ली गईं निजी काॅमर्शियल टैक्सियों में हो रहे नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रदेश पुलिस महानिदेशक को निर्देश जारी किए हैं।

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मोटर व्हीकल एक्ट में 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार किराये की गाड़ी में बत्ती या सायरन के इस्तेमाल पर न केवल ड्राइवर/मालिक, बल्कि विभागीय अधिकारी के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा सकती है। केवल आपातकालीन सेवाओं मसलन एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस को ही निर्धारित रंग की बत्तियां इस्तेमाल करने की अनुमति है। नियमों का उल्लंघन करने पर मोटर वाहन अधिनियम धारा 182ए(4) के तहत 5,000 से 10,000 तक जुर्माने का प्रावधान है।
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