स्थानीय निवासियों अमी चंद, जोगिंद्र सिंह, रूमेल सिंह, लाल सिंह, शेर सिंह, चैन सिंह, गिरधारी लाल ने कहा कि पंचायत में आज तक कोई भी शमशानघाट नहीं बना है। पैतृक श्मशानघाट पर जाने के लिए सड़क तक नहीं है।
जंगल के रास्ते से होकर पार्थिव देह श्मशानघाट पहुंचनी पड़ती है। पार्थिव देह को श्मशानघाट तक पहुंचाने के लिए एक ही खड्ड को दो बार पार करना पड़ता है। अगर बरसात के दिनों में किसी की मृत्यु हो जाए तो उफनती खड्ड को पार करना पड़ता है।
पंचायत प्रधान परगोड़ मनोहर लाल ने कहा कि जल्द ही पंचायत में श्मशानघाट का निर्माण किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ सुशील धीमान ने कहा कि परगोड़ नेरा सड़क का एस्टीमेट बनाकर निदेशालय को भेज दिया गया है।
मंजूरी मिलने के बाद सड़क का निर्माण शुरू किया जाएगा। बता दें कि नेरा गांव के लोग पिछले कई साल से सड़क बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सड़क नहीं बन पाई है। इसी साल 29 जनवरी को धर्मशाला में ग्रामीण सड़क की मांग को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मिले थे।