उस समय नहीं होती थी सच झूठ की राजनीतिः रोमेल
आज भी बिना चश्मे के स्कूटी चलाने वाले 106 वर्षीय ऑनरेरी कैप्टन रोमेल सिंह 1952 से पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनावों में लगातार मतदान करते आ रहे हैं। कैप्टन रोमेल कहते हैं कि पहले के जमाने में साधनों के अभाव में नेता और उनके समर्थक पैदल चुनाव प्रचार करते थे। चुनाव प्रक्रिया में काफी हद तक सादगी होती थी। प्रलोभन से लोग कोसों दूर थे। रेडियो से ही चुनावों के समाचार मतदाताओं तक पहुंचते थे। 1977 के चुनावों का प्रचार ट्रक के माध्यम से होना शुरू हो गया था। ट्रक में लगे लाउड स्पीकर पर बोलियां डालकर, नाच-गाकर पार्टी के पक्ष में नारे लगाकर समर्थक देर रात तक मतदाताओं को रिझाते थे। जलसों में भारी भीड़ जुटती थी। अब मतदाताओं की रिझाने के लिए सच-झूठ और प्रलोभन की राजनीति का बोलबाला है। संवाद