आबकारी विभाग में कमांडो फोर्स तैनात होगी
अब राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद सोमवार को इसे राजपत्र में अधिसूचित किया गया है। विधेयक के तहत यह व्यवस्था भी की गई है कि आबकारी विभाग में सेकंडमेंट आधार पर कमांडो फोर्स तैनात की जाएगी। यह नया कानून उन पर लागू होगा, जो किसी भी प्रकार की शराब का उत्पादन और विनिर्माण का अधिकार रखता हो या आयात, निर्यात और परिवहन करता हो। शराब विनिर्माण या उत्पादन के प्रयोजन के लिए कोई भी सामग्री, भट्ठी, उपकरण आदि चाहे जैसा भी हो, इसका उपयाेग करता है। अपराध के लिए कैद की अवधि तीन से पांच वर्ष और जुर्माना 50 हजार से पांच लाख रुपये तक होगा।
सरकार ने मामले को संज्ञेय अपराध भी बनाया
अन्य राज्यों में पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई हाेती है। सरकार ने मामले को संज्ञेय अपराध भी बना दिया है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संज्ञेय अपराध की परिभाषा ऐसे अपराध के रूप में की गई है, जिसमें गिरफ्तारी के लिए किसी वारंट की जरूरत नहीं होती। इस प्रकार के मामलों को गैर जमानती भी बना दिया गया है। पहले ऐसे अपराध पर सख्त कानून नहीं था। अब संपत्ति जब्त करने और पेनल्टी में बढ़ोतरी का भी प्रावधान किया गया है।