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सिर्फ एक क्लिक में पढ़िए राजधानी शिमला की पांच बड़ी खबरें

Fri, 06 Jan 2017 12:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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कार्टरोड पर लिफ्ट के पास बनी नगर निगम की नई कार पार्किंग में लोगों को पर्ची दिए बिना अधिक पैसा वसूला जा रहा है। पार्किंग टाइम पूरा होने के बाद अगर गाड़ी निकालने में पांच मिनट की भी देरी हो जाए तो अतिरिक्त समय के पैसे की मांग की जा रही है। हैरत की बात है कि ओवरटाइम के एवज में वाहन मालिकों को पर्ची भी नहीं दी जा रही। 
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एक या दो घंटे के लिए गाड़ी पार्क करने को लेकर भी आनाकानी की जा रही है, कम से कम चार घंटों के लिए गाड़ी पार्क करने का दबाव बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दस दिसंबर को इस पार्किंग का उद्घाटन किया था। पार्किंग का संचालन शुरू हुए एक महीना पूरा होने को है लेकिन अभी तक पार्किंग रेट का बड़ा डिसप्ले बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं समझी है। महज खानापूर्ति के लिए पार्किंग की पर्ची काटने के लिए बनाई गुमटी के बाहर छोटा सा रेट बोर्ड रख दिया है। 

पार्किंग में टैंपो ट्रेवलर पार्क करने की इजाजत नहीं है। पार्किंग कांप्लेक्स की मंजिलों की ऊंचाई कम होने के कारण इनमें टैंपो ट्रेवलर पार्क नहीं किए जा सकते। बावजूद इसके पार्किंग कांप्लेक्स के बाहर अवैध तरीके से ट्रेवलर पार्क कर दिए हैं। टैंपो ट्रेवलर पार्क करने की दरें भी सार्वजनिक नहीं की है। पार्किंग कांप्लेक्स के बाहर ही गाड़ियों की पर्चियां काटने का काम किया जा रहा है। इस कारण गाड़ियों की कतार बढ़ने से सर्कुलर रोड पर जाम की स्थिति पैदा हो रही है। 
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नहीं चलेगी मनमानी: आयुक्त
शहर की अन्य पार्किंगों की तर्ज पर नई लिफ्ट कार पार्किंग का संचालन भी मोबाइल ऐप से किया जाएगा। व्यवस्थाएं जांचने के लिए पार्किंग का औचक निरीक्षण भी होगा। पार्किंग संचालन में किसी भी प्रकार की मनमानी सहन नहीं की जाएगी। -पंकज राय आयुक्त नगर निगम

प्रिंटेड पर्ची से चल रहा लेनदेन: बंसल
पार्किंग में पूरा काम प्रिंटिड पर्ची पर चल रहा है, मैनुअल कोई काम नहीं है। सर्कुलर रोड पर जाम न लगे इसके लिए अलग-अलग एंट्री और एग्जिट बनाए हैं। पार्किंग रेट डिसप्ले करने के लिए बड़ा बोर्ड बना दिया है। जल्द ही इसे गेट पर लगा दिया जाएगा। पार्किंग में बूम बैरियर लगाने का भी प्रस्ताव है। - मदन बंसल, पार्किंग संचालक

पीपीपी मोड पर बनी है पार्किंग
लिफ्ट के पास नगर निगम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मोड) पर पार्किंग तैयार कर रहा है। मौजूदा समय में पार्किंग का पहला फेज ही तैयार हुआ है। इसमें 300 से अधिक गाड़ियां पार्क हो सकती हैं। बाकी बचे तीन फेस तैयार होने के बाद पार्किंग में 1000 गाड़ियां खड़ी हो सकेंगी। पार्किंग का निर्माण कर रही कंपनी शिमला टोलस एंड प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड 30 सालों तक इसका संचालन करेगी और निगम को सालाना एक करोड़ 
रुपये देगी। 

डिपो में लोग एटीएम से भी कर सकेंगे राशन की खरीददारी 
राशन के डिपुओं में खरीददारी करने के लिए जेब में पैसे नहीं हैं तो घबराने की जरूरत नहीं। अब शिमला शहर के डिपो में आप एटीएम और क्रेडिट कार्ड से भी भुगतान कर सकते हैं। महकमे की ओर से सभी डिपो संचालकों को निर्देश दे दिए हैं कि वह इसके लिए अलग से बैंक में (करेंट अकाउंट) खाता खुलवाए।

बैंक में खाता खुलने के बाद लोग स्वाइप मशीनों के जरिये राशन खरीद सकते हैं। पैसा सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा। ऑनलाइन भुगतान होने से डिपो में होने वाली हेराफेरी से भी राहत मिलेगी। मोदी की नोटबंदी पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हर विभाग अपने-अपने महकमे को कैश लैस बनाने में लगा है।

खाद्य आपूर्ति महकमे ने नये साल पर इस मुहिम को शुरू कर दिया है। महकमे का कहना है कि डिपुओं में जल्द ही स्वाइप मशीनें पहुंच जाएंगी। इसके बाद यह कार्य सुचारु रूप से शुरू हो जाएगा। हालांकि इससे पहले डिपो संचालकों को किसी भी बैंक में जाकर खाता खुलवाना होगा। बैंकों से मशीनों के मिलने के बाद स्वाइप के जरिये पूरा पैसा ग्राहक के खाते से डिपो संचालक के खाते में चला जाएगा।

शिमला शहर में करीब 54 डिपो के माध्यम से हजारों लोगों को राशन मुहैया करवाया जाता है। शहर में 30,018 राशनकार्ड धारक हैं। 1600 के करीब बीपीएल कार्ड धारक है। शिमला जिले में 550 के करीब डिपो हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पैसे न होने पर भी इन्हें राशन उपलब्ध करवाया जाएगा। 

खाते खोलने के दे दिए हैं निर्देश: सिंह
जिला नियंत्रक खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले पुरुषोत्तम सिंह ने बताया कि डिपो संचालकों को बैंकों में करेंट अकाउंट खोलने के निर्देश दे दिए हैं। इसके बाद उपभोक्ता राशन खरीदने के बाद ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं। इससे लोगों के साथ विभाग को भी आसानी रहेगी। 

केएनएच में स्पेशल वार्डों की 11.50 लाख से होगी रिपेयर
केएनएच में मरीजों को अब असुविधाओं के अभाव में परेशान नहीं होना पड़ेगा। अस्पताल प्रबंधन साढ़े ग्यारह लाख रुपये खर्च करके स्पेशल वार्ड की मरम्मत करवा रहा है। प्रत्येक वार्ड में आधुनिक तरीके के गीजर, ड्रेेनेज सिस्टम सहित फ्लोर में टाइलें लगाई जा रही हैं।

ऐसे में प्रदेश भर से स्पेशल वार्ड लेने वाले मरीजों को वार्ड में बदइंतजामी के चलते परेशानी नहीं होगी। पूर्व में वार्ड में मरीजों को बेहतरीन सुविधा और ड्रेनेज सिस्टम सही न होने के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बेहतर सुविधा न मिलने से मरीजों के परिजनों अक्सर अस्पताल प्रबंधन के समक्ष शिकायतें करते थे।

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एलएस चौधरी ने बताया कि इन दिनों स्पेशल वार्ड की रिपेयर करने का काम जोरों पर है। मौजूदा समय में अस्पताल प्रबंधन एक-एक कमरे की रिपेयर करवा रहा है। इससे मरीजों को राहत मिलेगी।  केएनएच में मौजूदा समय में स्पेशल वार्ड के 14 कमरे हैं। 

शहर में स्थापित होंगे 11 नए ई-टायलेट
परंपरागत शौचालयों के स्थान पर नगर निगम राजधानी शिमला के विभिन्न वार्डों में ई-टॉयलेट स्थापित करेगा। नगर निगम ने 11 नए ई-टॉयलेट खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। ई-टॉयलेट की खरीद पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होंगे। ई-टायलेट स्थापित करने पर न सिर्फ खर्चा कम आएगा बल्कि मेंटेनेंस भी आसानी से हो सकेगी।

नगर निगम शौचालयों का रखरखाव भी आसानी से कर सकेगा। अभी तक नगर निगम ने छोटा शिमला और रिज मैदान पर टका बैंच के पास ई-टॉयलेट स्थापित किए हैं। 11 नए ई-टॉयलेट में से 5 पुरुषों और 5 महिलाओं के लिए तथा एक बच्चों के लिए स्थापित होगा। नगर निगम ने पहले चरण में 4 ई- टॉयलेट के लिए स्थान चिन्हित कर लिए हैं।

टूटीकंडी आईएसबीटी के बाहर दो लेडीज और जेंटस टॉयलेट स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा नवबहार में भी दो लेडीज और जेंटस टॉयलेट स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा शहर के ऐसे क्षेत्रों में जहां लोगों की आवाजाही अधिक है और सार्वजनिक शौचालय नहीं है ई-टॉयलेट स्थापित किए जाएंगे।

नगर निगम के आयुक्त पंकज राय ने कहा कि 11 नए ई-टॉयलेट खरीदने के लिए नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। वार्ड स्थल पर ई-टायलेट स्थापित करने के लिए जगह का चयन किया जा रहा है। जल्द ही ई-टॉयलेट की खरीद प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। 

पूना में मजदूरों की मौत के मामले में जांच के आदेश
प्रदेश के दुर्गम क्षेत्र काशापाट के पूना गांव में बुधवार सड़क निर्माण में जुटे चार नेपाली मजदूरों की मलबे के नीचे दबकर अकाल मौत से कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि हादसे के कारण क्या थे और कौन लोग इन मौतों के लिए जिम्मेदार हैं, इसे लेकर बैठाई जांच के  बाद ही परतें खुल पाएंगी। हादसे के पीछे किसकी कोताही रही जिस वजह से मजदूरों को जान गंवानी पड़ी भी जांच का विषय है। 

शिमला के उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने चट्टानों के नीचे दबकर मारे गए चार मजदूरों की मौत के मामले की जांच के आदेश एसडीएम को दे दिए हैं। रामपुर के एसडीएम डॉ. निपुण जिंदल को डीसी ने 15 दिन की अवधि के भीतर जांच करके विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। 

एसडीएम की जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले की परतें खुलकर सामने आ सकेंगी। सवाल यह है कि जब प्रदेश में सड़कों का निर्माण किया जाता है तो पहाड़ों की कटिंग के दौरान ठेकेदारों के साथ मौके पर लोक निर्माण विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों का मौजूद रहना जरूरी रहता है या नहीं? सड़क निर्माण के दौरान पूना गांव में एक ऐसा दर्दनाक हादसा हो चुका है, जिसमें निर्माण में लगे चार मजदूरों को अकाल मौत के मुंह में समाना पड़ा। 

दुर्गम क्षेत्र काशापाट के पूना गांव में सड़क बनाने के लिए कटिंग का काम जोरशोर से चलाया जा रहा था और अचानक मलबे के नीचे चारों मजदूर दब गए और मौके पर ही दम तोड़ गए। लोनिवि के एसडीओ सुभाष कहते हैं कि सड़क निर्माण के दौरान जेई और फील्ड स्टाफ वर्क इंस्पेक्टर और सुपरवाइजर मौजूद रहने अनिवार्य रहते हैं।

विभाग इस हादसे को प्राकृतिक घटना मान रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जेई और फील्ड स्टाफ मौके पर रहने अनिवार्य हैं तो फिर कहां चूक हुई? चार मजदूर उनके सामने मौत के मुंह में समा गए? क्या इन अधिकारियों ने खतरे को पहले नहीं भांपा या मौके से गायब थे? डीसी शिमला रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि एसडीएम को मामले की जांच को कहा गया है और रिपोर्ट 15 दिन के भीतर देने के निर्देश दिए हैं।
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