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दस घरों की एक करोड़ की संपत्ति जलकर स्वाहा

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आग की लपटों ने हिमाचल के चंबा जिले की अठलुई पंचायत के समैला गांव में आधे घरों को जलाकर राख कर दिया। गांव में कोहराम मच गया है। आग का यह तांडव सोमवार रात करीब साढ़े आठ बजे शॉर्ट सर्किट से शुरू हुआ। मंगलवार दोपहर तक घर सुलगते रहे। नौ घर पूरी तरह राख हो गए हैं जबकि एक घर को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
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जो घर जल गए, उनमें बच्चों की किताबें और बेटियों की शादी के लिए जमा किए गए गहने भी आग की भेंट चढ़ गए। नौ परिवारों के पास खाने के लिए न राशन बचा है और न रहने के लिए छत। इस अग्निकांड में एक करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार रात बालो राम के घर में अचानक जोरदार धमाका हुआ और कमरे में आग लग गई। देखते ही देखते पूरा कमरा आग की चपेट में आ गया। आग की लपटें आसपास के घरों तक पहुंच गईं और आधा गांव आग से भड़क उठा। लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे। लेकिन पानी न होने की वजह से आग को रोका नहीं जा सका।
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जंगल से पहुंचाया पानी- सोमवार रात करीब साढ़े दस बजे आसपास के गांव से लोगों का हुजूम समैला गांव पहुंच गया। लोगों ने वर्षा जल संग्रहण के लिए जंगल में बनाए गए टैंक से एक चेन बनाकर पानी पहुंचाया। इस कोशिश में से कई घरों को बचा लिया गया।

किसी को सोलह तो किसी को नौ लाख का नुकसान

हिमाचल के चंबा जिले के अठलुई के समैला में हुए भीषण अग्निकांड में करीब एक करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। दस परिवार बेघर हो गए हैं। यहां सबसे ज्यादा नुकसान धर्म चंद पुत्र हीरू राम को हुआ है। उसके आठ कमरे आग की भेंट चढ़ गए हैं। इन कमरों के अंदर रखे सामान को भी वह या उसके परिवार का कोई सदस्य नहीं बचा पाया।

अग्निकांड में उसे करीब 16 लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इसी प्रकार कांता देवी, बालो पुत्र मोहन व चतरो पुत्र हीरू राम तीनों को अग्निकांड में 12-12 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। कांता देवी ने बताया कि उसके तीन कमरे व कीमती सामान आग की भेंट चढ़ गया, जबकि बालो के छह कमरे व सामान व चतरो राम के छह कमरे व दो रसोई समेत अंदर रखा पूरा सामान आग की भेंट चढ़ गया है।

सिर ढकने के लिए छत तक नहीं बची

इसके अलावा उत्तम पुत्र हीरू के तीन कमरे व सामान करीब दस लाख रुपये, सरनो पुत्र हीरू तीन कमरे व सामान करीब दस लाख रुपये, मनेश पुत्र मोहन तीन कमरे व सामान करीब नौ लाख रुपये कर्मो पुत्र हीरू राम चार कमरे व सामान करीब आठ लाख रुपये अंबो पुत्र हीरू राम दो कमरे व सामान करीब पांच लाख रुपये धारो पुत्र धीरू करीब छह लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द राहत राशि देने की मांग की है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास रहने और खाने के लिए कुछ नहीं बचा है। मौसम खराब होने की वजह से वे खुले आसमान के नीचे भी नहीं रह सकते हैं। उनकी उम्मीद अब प्रशासन पर टिकी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन से राहत मिलेगी, जिससे वे आगे की जिंदगी गुजार पाएंगे।

आंखों के सामने जलकर राख हो गए घर

मेहनत से एक-एक पाई जोड़कर बनाए गए घर आंखों के सामने जलकर राख हो गए, लेकिन सैकड़ों की संख्या में मौजूद गांव के लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। अठलुई पंचायत के समैला गांव के दस परिवार इस दर्द को जिंदगी भर नहीं भुला पाएंगे। सोमवार देर शाम को घर में लगी आग से लोगों की जिंदगी बदल दी है। देर शाम के समय सभी लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे। उन्हें क्या पता था कि आने वाले समय में उन्हें घर से बेघर भी होना पड़ सकता है।

आग इतनी तेजी से आगे बढ़ी कि जब तक आग को काबू में पाया जाता, तब तक लोग अपना सब कुछ खो चुके थे। आग से प्रभावित अधिकतर परिवार ऐसे हैं, जो एक कपड़े व जूते का जोड़ा भी नहीं बचा पाए। पीड़ित परिवार के एक मुखिया बालो राम अपने काम से अभी तक घर तक नहीं पहुंचे थे। देर शाम दिनभर काम करने के बाद बालो राम घर पहुंचे तो देखा कि मेहनत से बनाया गया घर जलकर राख हो गया है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि घर बनाने की सामग्री को घर तक पहुंचाने के लिए सामाग्री से चार गुना खर्चा ढुलाई में खर्चा आता है। काफी कठिनाई से अपने घर का निर्माण करवाया था, लेकिन कुछ ही समय के बाद जिंदगी भर की कमाई आग की भेंट चढ़ गई।

समैला में अब आसानी से नहीं बनेंगे आशियाने

अठलुई पंचायत के समैला में भीषण अग्निकांड में कई परिवारों के सपने खाक हुए हैं। बेघर हुए परिवारों के लिए यहां दोबारा आशियाने बसाना आसान नहीं होगा। जो घर आग की भेंट चढ़े हैं, वे काफी वर्ष पुराने थे और देवदार की लकड़ी के बने हुए थे, लेकिन अब लकड़ी पर रोक लगने के बाद इन मकानों को दोबारा उसी रूप में बना पाना संभव नहीं होगा। अग्निकांड की भेंट चढ़े मकान दो से तीन मंजिल तक थे। इन मकानों को भूकंप रोधी तकनीक पर मिट्टी, पत्थर और लकड़ी से बनाया गया था।

मकानों की दीवारों पर आड़ी-तिरछी देवदार की लकड़ी लगाई गई थी ताकि बड़े से बड़ा भूकंप आने पर भी मकान को नुकसान न पहुंचे, लेकिन ये मकान आग की चिंगारी से महफूज नहीं थे। सोमवार को जब बिजली का लोड बढ़ा तो एक मकान और फिर उसके बाद अन्य सभी मकान दहक उठे। समैला में बेघर हुए लोगों उत्तम, सरनो, कांता, मनेश, चतरो व बालो राम ने बताया कि समैला तक सड़क नहीं है और सड़क से गांव तक रेत, बजरी, पत्थर या सीमेंट लाने में भारी ढुलाई देनी पड़ती है।

एक पिकअप गाड़ी करीब 1200 रुपये में सड़क किनारे लोगों को मिलती है उसे समैला तक पहुंचाने के लिए घोड़े चालकों को करीब दो हजार रुपये सिर्फ ढुलाई के ही देने पड़ते हैं। पूर्व में मिट्टी और देवदार से उनके पूर्वजों ने मकान बनाए थे, लेकिन अब देवदार की लकड़ी मिलना आसान नहीं है और उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं, जो वे सीमेंट से मकान बनाने के संबंध में विचार कर सकें। उन्होंने प्रशासन से आह्वान किया है कि उन्हें देवदार की लकड़ी उपलब्ध करवाई जाए ताकि वे दोबारा अपनी रिहायश बसा सकें।

राज्य सहकारी बैंक में लगी आग, पुराना रिकॉर्ड जला

जोगिंद्रनगर(मंडी)। जोगिंद्रनगर बस अड्डा के पास राज्य सहकारी बैंक की शाखा में मंगलवार सुबह आग लगने से बैंक का पुराना रिकॉर्ड व स्टेशनरी जल कर राख हो गई। दमकल कर्मचारियों की मुस्तैदी से स्ट्रांग रूम में लगी आग पर काबू पाया। जिससे बैंक का अहम बैकिंग रिकॉर्ड जल से बचा लिया गया। मंगलवार सुबह करीब पौने नौ बजे पार्ट टाइम कर्मी राकेश ड्यूटी के लिए बैंक पहुंचा। बैंक की छत से धुआं उठता देख कर उसने आसपास लोगों के साथ बैंक प्रबंधन और फायर स्टेशन को सूचित किया।

दमकल कर्मियों ने तत्काल घटनास्थल पर पहुंच कर बैंक के अंदर स्ट्रांग रूम में लगी आग को काबू किया। बैंक में आग लगने से अफरा तफरी मच गई। आग लगने से बैंक वर्ष 2005 से 2007 का रिकॉर्ड जल गया। जिसमें बैंक के बाउचर और स्टेशनरी का सामान शामिल है। कर्मचारियों ने बैंक का सारा सामान बैंक सुरक्षित बाहर निकाला।

राज्य सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक चरण सिंह ने बताया कि आग कैसे लगी इसकी छानबीन की जा रही है। आग से कुछ पुराने बाउचर व स्टेशनरी जली है। बाकी सारा सामान व रिकॉर्ड सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि बैंक के दरवाजे बंद थे तो इस पर चौरी का अनुमान भी नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि पुराने बाउचर और स्टेशनरी के जलने के सिवाय उन्होंने सारा सामान इस घटना से सुरक्षित निकाल लिया है। गनीमत यह रही कि यह आग बैंक की छत तक नहीं पहुचीं अगर यह आग लकड़ी को अपनी चपेट में ले लेती तो किसी बड़ा हादसा हो सकता था।

बैंक के नीचे व्यवसायिक दुकानें है। आग बैंक के स्ट्रांग रूम में लगी थी। जिससे कुछ पुराना रिकार्ड जला है।
एसडीएम जोगिंद्र्रनगर राहुल चौहान, नायब तहसीलदार दुर्गा दास ने मौके पर पहुंच कर नुकसान का जायजा लिया। आगजनी की घटना से बैंक में कामकाज ठप रहा। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
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आग में दो झुलसे, 8 लाख की नगदी जली

नालागढ़ (सोलन)। राजपुरा पंचायत के थांथेवाल में आग लगने से छह अस्थाई कमरे जल कर राख हो गए। वहीं गांव में जमीन खरीदने के लिए रखी करीब आठ लाख की नगदी और 40 हजार के जेवरात भी स्वाह हुए और दो दुधारू पशुओं की मौत हो गई। मध्यरात्रि को उस समय आग लग गई जब यूपी के मुरादाबाद निवासी राम प्रसाद का पूरा परिवार झुग्गियों में सोया हुआ था।

आग लगते ही मवेशी जोर जोर से चिल्लाने लगे जिससे परिवार की आंख खुली और सभी ने भागकर जान बचाई। इसमें कुल मिलाकर करीब 10 लाख के नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है। प्रभावित रामप्रसाद ने बताया कि उसने नालागढ़ के चौकीवाला में जमीन खरीदी है। जिसके आठ लाख रुपये उन्होंने पहले दे दिए थे और आठ लाख रुपये मंगलवार को देने थे, लेकिन आग से पूरे पैसे जल कर राख हो गए।

यह घटना सोमवार साढ़े 11 बजे की है। प्रवासी कामगार रामप्रसाद अपने चारों बेटे सोमपाल, कंवर पाल, हरि सिंह व सरवन के साथ तीन झुग्गियों में सोए हुए थे। जबकि तीन झुग्गियों में दुधारू पशु व चारा रखा हुआ था। साढ़े 11 बजे अचानक आग लग गई। इस दौरान मवेशी के जोर से चिल्लाने की आवाज आई तो रामप्रसाद की नींद खुल गई।

उसने आग देखते ही शोर मचाया तथा परिवार के सभी 15 सदस्यों को झुग्गियों से बाहर निकाला, लेकिन कोई भी सामान नहीं निकाल पाए। इस दौरान सोमपाल की पीठ व बीरपाल की मुंह आग के लपटों में झुलस गया। झुग्गियों में बंधी 8 भैंसे, दो गाय व पांच बछड़ी व कटड़ू बुरी तरह से झुलस गए। इसमें से दो छोटी बछड़ियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

राम प्रसाद ने बताया कि आग से झुग्गियों में रखा दस क्विंटल मूली का बीज, 5 क्विंटल प्याज, दस क्विंटल गेहूं, 8 लाख रुपये नकदी, चालीस हजार के सोने के गहने, गेहूं की तूड़ी समेत खाने पीने का सामान, कपड़े, बिस्तर व बर्तन जल कर राख हो गए।
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