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Himachal : बद्दी की परफ्यूम फैक्टरी में लगी आग बुझाने की कोशिशें जारी, एक महिला की मौत; अब भी कई लापता

Sat, 03 Feb 2024 02:02 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन

सार

इस हादसे में अब तक एक महिला की मौत हो चुकी है। 31 घायल हैं और नौ लोग अब भी लापता हैं। 
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झाड़माजरी में औद्योगिक इकाई में भड़की आग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र झाड़माजरी के बद्दी में हिलटाॅप स्थित परफ्यूम बनाने वाली अरोमा फैक्टरी में शुक्रवार दोपहर 12:00 बजे के बाद लगी आग को बुझाने की कोशिशें जारी हैं। इस हादसे में अब तक एक महिला की मौत हो चुकी है। 31 घायल हैं और नौ लोग अब भी लापता हैं।  आग बुझाने की कोशिशें जारी

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दमकल अधिकारी संजीव ने बताया कि यहां 22 से ज्यादा गाड़ियां तैनात हैं। 10-12 फायर टेंडर हिमाचल फायर सर्विस के हैं... कुछ गाड़ियां पंजाब फायर सर्विस और हरियाणा फायर सर्विस की हैं।  आग बुझाने का काम चल रहा है। अभी नहीं बता सकते कि अंदर कितने लोग हताहत होंगे। लोगों के मुताबिक अब तक एक मौत हो चुकी है और 31 लोग घायल हैं।
खबर है कि पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती चार लोगों की हालत गंभीर है। 25 घायल सोलन के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। नालागढ़ के एसडीएम दिव्यांशु सिंघल ने बताया कि प्रशासन के पास नौ लोगों के परिजनों ने उनके लापता होने की जानकारी दी है। घटना के वक्त फैक्टरी में करीब 50 कामगार मौजूद थे। आग कैसे लगी, इसका कारण अभी पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक जांच में शार्ट सर्किट से केमिकल में आग लगने के कयास लगाए जा रहे हैं। बद्दी के पुलिस अधीक्षक इलमा अफरोज ने बताया कि फैक्टरी के खिलाफ बरोटीवाला थाने में लापरवाही बरतने पर मामला दर्ज किया गया है।
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मृतका की पहचान पिंकी पत्नी पवन, निवासी मखनूमाजरा, बद्दी के रूप में हुई है। पीजीआई में भर्ती आरती, चरण सिंह, गीता और प्रेम कुमारी की हालत गंभीर हैं। इनमें तीन की रीड की हड्डी टूट गई है। निचली मंजिल में आग लगते ही 30 लोग ऊपरी तीन मंजिलों और छत से कूद गए। ज्यादातर घायलों में मल्टीपल फ्रेक्चर आए हैं। आग बुझाने के लिए चंडी मंदिर स्थित आर्मी, कालका, परवाणू, पिंजौर, नालागढ़, बद्दी, बिरला, वर्धमान और टीवीएस कंपनी से फायर टेंडर बुलाए गए। एनडीआरएफ की टीम भी बचाव कार्य में जुट गई है। उधर, पीजीआई चंडीगढ़ के सरकारी प्रवक्ता प्रो. िवपिन कौशल ने बताया कि एक महिला की यहां मौत हो गई है, जबकि यहां भर्ती बद्दी के रहने वाले चारों की हालत स्थिर है। उन्हें मामूली झुलसने के साथ-साथ रीढ़, सिर में चोटें आई हैं।



मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिए जांच के आदेश
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और बद्दी की मृतक महिला के प्रति शोक व्यक्त किया।

कंपनी में ज्यादातर ठेकेदार के कामगार थे। जैसे ही निचली मंजिल में आग लगी, तो लोग खिड़कियों से कूद गए, जिससे उक्त कामगार चोटिल हो गए। अभी चार पीजीआई मेें, छह काठा अस्पताल बद्दी, 21 झाड़माजरी स्थित ब्रुकलिन अस्पताल में भर्ती हैंै। करीब 20 कामगार लापता हैं। आशंका है कि कुछ कामगार वहां से निकलकर घर भाग गए हैं। जल्द लापता लोगों की सूची तैयार कर सार्वजनिक की जाएगी।- मनमोहन शर्मा, उपायुक्त, सोलन

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घायलों के नाम
घायलों में तारावती व सलोनी निवासी पसूंगा मांडलीसंभल, यूपी, सपना निवासी शेखपुर बदायूं यूपी, कांति निवासी विसौली जिला बदायूं, कंचन निवासी गांव खटेटा, चंदौसी उत्तर प्रदेश, खुशबू पुत्री विष्णु निवासी फैचल बदायूं, सावित्री निवासी चंदौसी उत्तर प्रदेश, राजकुमारी निवासी गांव असालपुर चंदौसी यूपी के अलावा अनिता, आशा, दीप शिखा, ममता, अनिल, सलेस्टिना, पुष्पा, कश्मीरी, पूजा, अंशु, सावित्री, चरण सिंह, सतिंद्रा, राममूर्ति, आरती, गीता, प्रेम कुमारी, मीरा, शिव कुमार, प्रेम लता, अर्चना, हरीश चंद्र शामिल हैं।
 

ज्वलनशील एसिड से भरी थी कंपनी, जल्दी पकड़ ली आग
 बद्दी के झाड़माजरी में परफ्यूम बनाने वाली कंपनी में लगी भयानक आग ने सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी में कई तरह के खतरनाक एसिड रखे गए थे। यह सभी एसिड परफ्यूम बनाने के काम आते हैं। इसमें खासतौर पर परफ्यूम बनाने में बेंजाइल अल्कोहल, एसिटोन, इथेनॉल, इथाइल, फॉरेमेलिडीहाइड, बेंजिलडिहाइड, मिथाइनिन क्लोराइड, लिमोनिन और तारपीन समेत कई तरह के एसिड इस्तेमाल होते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह सभी एसिड ज्वलनशील होते हैं और हल्की सी चिंगारी से भी आग पकड़ लेते हैं।
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इसमें सबसे जल्दी आग पकड़ने वाला एसिड बेंजाइल अल्कोहल, इथेनॉल समेत कई एसिड ऐसे थे, जो तुरंत आग पकड़ते हैं। अब आशंका है कि जैसे ही कंपनी में हल्की से चिंगारी भड़की तो तुरंत ही यहां पर एसिड ने आग पकड़ ली। कामगारों के पास इतना भी समय नहीं था कि वह आग बुझा पाते। हालांकि इसमें सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या कामगारों को आग बुझाने के यंत्रों की जानकारी नहीं थी। मगर कुछ एसिड इस तरह के भी थे,जिनमें आग पर काबू पाना मुश्किल था। आग पर काबू पाने में भी करीब आठ से नौ घंटे लग गए।
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