मंडी में नेरचौक हादसा शिमला के कारोबारी अमित सोहल को कभी न भूलने वाला जख्म दे गया है। हादसे में अमित की पत्नी मोना, मां सुदेश सोहल और पांच साल के बेटे साहिल की दर्दनाक मौत हो गई। अब परिवार में अमित के अलावा उनकी बेटी समीक्षा है। 42 वर्षीय अमित सोहल शिमला के रामबाजार में भाई दीपक के साथ दीपक स्वीट्स के नाम से होटल चलाते हैं।
वह कसुम्पटी के परिमहल स्थित वर्मा अपार्टमेंट की हिल टॉप बिल्डिंग में रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार अमित की पत्नी मोना जेबीटी टीचर थीं जो संजौली के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाती थीं। पांच साल का बेटा साहिल सेंट एडवर्ड स्कूल में पहली कक्षा का छात्र था।
अमित के पड़ोस में रहने वाले एसके शर्मा ने बताया कि तीन दिन पहले ही पूरा परिवार रिश्तेदार की शादी में शरीक होने के लिए मंडी रवाना गया था। मंडी में अमित के मामा के बेटे की शादी थी। सोमवार को रिसेप्शन थी। लेकिन सुबह हुए अग्निकांड में एक कमरे में सो रही अमित की पत्नी, बेटे और मां की दर्दनाक मौत हो गई। अमित दूसरे कमरे में सो रहे थे।
हादसे की सूचना मिलते ही शहर में सन्नाटा पसर गया। रामबाजार में सुबह से ही कारोबारियों ने दुकानें बंद रखीं। दीपक स्वीट्स में काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि होटल मालिक कुछ दिन पहले बैंगलोर गए हैं। वहीं, अमित भी किसी समारोह में चले गए। इसके बाद कर्मचारी ही होटल में थे। सुबह हादसे का पता चला। इसके बाद होटल बंद कर दिया। होटल का ज्यादातर स्टाफ भी मंडी चला गया है।
हादसे की सूचना मिलने के बाद कसुम्पटी पार्षद राकेश चौहान भी कारोबारी अमित के घर पहुंचे। लेकिन घर पर ताला लगा था। आसपास के लोगों से बात की तो पता चला कि दो तीन दिन से घर पर ताला लगा है। पार्षद ने बताया कि तीन दिन पहले ही अमित ने चरित्र प्रमाण पत्र बनाने को लेकर उनसे बात की थी।
उन्होंने उप महापौर से कहकर प्रमाण पत्र बनवा दिया था। सोमवार सुबह हादसे का पता चला तो वे अमित के घर पहुंच गए। यहां परिवार के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि बेटा सेंट एडवर्ड में पढ़ता था जबकि पत्नी टीचर थी। छुट्टी लेकर सभी समारोह में गए थे। कहा कि यह बड़ी दुखद घटना है। कसुम्पटी से काफी लोग मंडी चले गए हैं। तीनों का मंडी में ही अंतिम संस्कार किया गया।
कारोबारी पिता अमित का आखिरी सहारा अब बेटी समीक्षा ही रह गई है। बेटी समीक्षा ताराहॉल स्कूल में नौवीं कक्षा की छात्रा है। स्कूल में परीक्षाएं होने के कारण समीक्षा शादी में नहीं जा पाईं। बताया जा रहा है कि यहां समीक्षा अपने एक रिश्तेदार के पास ठहरी थी।
सुबह जब हादसे का पता चला तो होटल स्टाफ बिना कुछ बताए इसे मंडी ले गए। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि हादसा बेहद दर्दनाक है। कई कारोबारी भी मंडी गए हैं।
एक साथ पांच मौतों के भीषण हादसे से कुछ ही घंटे पहले तक इन सभी के खिलखिलाते चेहरे कैमरे में कैद हुए थे। लेकिन बेदर्द नियति ने पांच जिंदगियों को खामोशी के साथ मौत की नींद सुला दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी की मौत दम घुटने से बताई गई है।
ऐसे में माना जा रहा है कि एसी में शार्ट सर्किट के बाद काष्ठकुणी शैली से घर में बनाई गई नक्काशीदार छत और दीवारें सुलग उठीं। इसी आग से धुएं के गुबार उठे जिसमें पांचों बेहोश हो गए और सभी ने दम तोड़ दिया।
झकझोर देने वाले इस हादसे में परिवार के बाकी सदस्यों की चीख-पुकार भी काम नहीं आई। किसी ने आंखों के सामने बेटे, पत्नी और मां को आग में समाते देखा तो कोई अभागा बेटा माता पिता को चाहते हुए भी बचा न सका। शादी की खुशियों से सराबोर घर में अचानक मौत के तांडव ने देखते ही देखते सारी खुशियां छीन लीं।
छत और दीवारों के धू धू जलने के बाद आग की लपटों ने रसोईघर को चपेट में लिया। वहां पर रखे गैस सिलिंडर के धमाके से आग और भड़क गई। जब तक पास वाले घर में सोए परिवार के दूसरे सदस्य कुछ कर पाते, घर बारूद के ढेर जैसा धधक रहा था। अपनों को बचाने के लिए आग में कूदने को उतारू परिवार के सदस्यों को स्थानीय लोगों ने बड़ी मशक्कत के बाद रोका।
जोनल अस्पताल मंडी में तैनात डॉक्टर हरजिंदर ने कहा कि अग्निकांड में मारे गए सभी लोगों की मौत दम घुटने से हुई है। बॉडी पर जलने के निशान बेहद कम हैं। हालांकि, कुछेक बॉडी मौत के बाद आग से जली हैं।
मंडी/नेरचौक। आपदा प्रबंधन के नाम पर आए दिन मॉकड्रिल और क्विक एक्शन की रिहर्सल में सरकार लाखों रुपये खर्च कर देते ही है लेकिन मुसीबत के ऐन मौके पर प्रबंधन धराशायी हो जाता है। पांच लोगों की जान लेने वाला नेरचौक अग्निकांड आपदा की घटनाओं से निपटने की तैयारियों की पोल खोल गया। मंडी से 15 किमी दूर घटनास्थल पर पहुंचने के लिए अग्निशमन विभाग को एक घंटे से अधिक समय लगा।
फायर ब्रिगेड करीब 4:50 बजे मौके पर पहुंची। जबकि, स्थानीय लोगों का दावा है कि चार बजे के करीब ही कंट्रोल रूम को आग लगने की सूचना दे दी गई थी। लेकिन, फायर कर्मी एक घंटे के बाद मौके पर पहुंचे। वहीं, फायर स्टेशन मंडी के अधिकारियों का तर्क है कि उन्हें आग की सूचना पौने पांच बजे के करीब मिली थी। टीम 5:10 बजे मौके पर पहुंच गई थी।
हालांकि, इस दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से कई लोगों की जान बचाई गई। फायर ब्रिगेड के मौके पर देरी से पहुंचने पर रोष जाहिर किया गया। मंडी से फायर टीम के मौके पर पहुंचने के करीब 10 मिनट बाद सुंदरनगर से भी टीम मौके पर पहुंच गई थी। दोनों टीम ने करीब तीन घंटे के बाद आग पर काबू पाया। जबकि, पौने छह बजे के करीब पंडोह से भी गाड़ी मौके पर पहुंच गई थी।
आग पर काबू पाना था मुश्किल- जानकारी के अनुसार सुबह चार बजे के करीब जैसे ही स्थानीय लोगों को आग लगने का पता चला तो आनन-फानन में कंट्रोल रूम में सूचना दी गई। इसी दौरान स्थानीय लोग राहत और बचाव कार्य में जुट गए। लोग खिड़कियां तोड़कर घर के अंदर दाखिल हुए और शवों को बाहर निकाला।
20 मिनट में मौके पर पहुंचे- अग्निशमक अधिकारी फायर स्टेशन मंडी पिनाप सिंह ने कहा कि करीब पौने पांच बजे उन्हें कंट्रोल रूम से आग लगने की सूचना मिली थी। 20 से 25 मिनट के भीतर 05:10 बजे मौके पर पहुंच गए थे। बीबीएमबी सुंदरनगर से भी मदद मांगी गई थी। सुंदरनगर से गाड़ी करीब 05:20 बजे पहुंच गई। आग से करीब 20 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। घर की ऊपरी मंजिल को बचा लिया गया है। हादसे में पांच लोग और एक पालतू कुत्ता जल गए हैं।