पुलिस थाना छोटा शिमला में दर्ज एफआईआर में किसी अधिकारी को आरोपी के रूप में नामजद तो नहीं किया गया है, मगर माना जा रहा है कि इसकी छानबीन के दौरान आगामी दिनों में प्रशासन और पुलिस में तैनात कुछ अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकते हैं।
भंडारी ने मई महीने में छोटा शिमला थाना प्रभारी को इस संबंध में एफआईआर दर्ज करने की शिकायत की थी। इस पर गौर नहीं हुआ तो वह सीजेएम कोर्ट चले गए।
अदालत ने 156(3) सीआरपीसी के तहत पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं, जिस पर पुलिस ने सोमवार रात अमल कर मामला दर्ज कर लिया। जल्द ही जांच का जिम्मा वरिष्ठ अफसर को सौंपने की तैयारी है।
पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी के अनुसार उनके पास जब एडीजीपी सीआईडी का भी चार्ज था तो उसी दौरान 24 दिसंबर 2013 की आधी रात को कुछ अफसरों ने सीआईडी की गोपनीय तकनीकी सेल में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया।
यहां से जिन कंप्यूटरों को हटवाया गया, उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने असामाजिक तत्वों की गुप्त सूचनाएं थीं। इन्हें कई साल तक कानूनन एकत्र किया गया था। ये सूचनाएं एनडीपीएस एक्ट, आईपीसी और भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम में चल रहे मुकदमों के लिए महत्वपूर्ण थी।
कार्यालय में मेरी अलमारी को मुझे विश्वास में लिए बगैर गैर कानूनी तरीके से हटवाया गया। मेरे कई दस्तावेज और सामान भी कब्जे में लिया, मुझे नहीं लौटाया गया।
सीआईडी कार्यालय में गैर कानूनी टेलीफोन इंटरसेप्शन का कोई प्रावधान नहीं था। झूठा केस दर्ज कर मेरी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। बहुत से टॉप सीक्रेट सार्वजनिक कर दिए गए।
सीआरपीसी -173 के तहत झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाते हुए बगैर किसी सामग्री और अधिकार क्षेत्र के सीजेएम कोर्ट में चालान पेश किया गया। इसके मुताबिक दो टेलीफोन कुछ मिनटों के लिए गैर कानूनी तरीके से टैप किए गए।
अगर ये सत्य भी था तो भी सीआईडी के पास इन्हें टैप करने को कानूनी अधिकार था। उनके खिलाफ दर्ज एफ आईआर मेें न तो कोई शिकायतकर्ता था और न ही पीड़ित।
भंडारी ने कहा कि चालान पेश होने के बाद उन्होंने कोर्ट में सीआरपीसी 239 के तहत डिस्चार्ज करने की अरजी दी। मेरी दरख्वास्त को मंजूर किया गया और कोर्ट ने डिस्चार्च कर दिया। इसके बाद सेशन कोर्ट में अपील पर भी सीजेएम के फै सले को सही ठहराया गया।
मई 2018 में आईडी भंडारी ने इसी मामले में एकशिकायत पत्र छोटा शिमला थाने में दिया, जिसमें कई सेवानिवृत्त और वरिष्ठ आईएएस तथा आईपीएस अफसरों को भी नामजद किया।
शिकायत पढ़ने के बाद एसएचओ ने एसपी शिमला के ध्यान में मामला लाया। एसपी कार्यालय की ओर से आगामी राय लेने के लिए इसे प्रदेश पुलिस मुख्यालय भेजा गया। यहां से शिकायत पत्र विजिलेंस को भेजा गया।
विजिलेंस ने शुरुआती जांच की, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की। मामले में कोई प्रगति न देख आईडी भंडारी अदालत की शरण में गए और एफआईआर दर्ज करवाई।
छोटा शिमला थाने में एफआईआर दर्ज कर आगामी छानबीन अमल में लाई जा रही है।- ओमापति जमवाल, पुलिस अधीक्षक, शिमला