लोगों का आरोप है कि कंपनियों ने उपरोक्त गांव के लोगों की जमीन में जबरन घुसकर बिजली के टॉवर लगा दिए और बाद में घरों के ऊपर से बिजली के तार बिछा दिए। इसके लिए हरे-भरे पेड़ों को भी काटा गया है। मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता रजनीश शर्मा ने बताया कि इसके लिए कंपनियों ने वन विभाग, उद्यान विभाग, राजस्व विभाग तथा कृषि विभाग से मंजूरी भी नहीं ली गई और न ही नुकसान का आकलन किया गया जो हिमाचल सरकारों के तय किए नियमों का उल्लंघन है।
एफआईआर में रिलाइंस एनर्जी मिलिटेड के चेयरमैन अनिल अंबानी समेत सात बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। पार्वती कोलडैम ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (पीकेटीसीएल) के सात, केईएसी इंटरनेशनल कंपनी के दस, टाटा पावर के 11, ज्योति स्ट्रक्चर लिमिटेड के चार तथा कलपत्रू कंपनी के दस बोर्ड ऑफ डायरेक्टर नामजद किए हैं।
पुलिस अधीक्षक कुल्लू गौरव सिंह ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र रचने तथा पर्यावरण व वन संपदा को नुकसान पहुंचाने कई धाराओं के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। जिला कुल्लू के सैंज से पंजाब के लुधियाना तक करीब 303 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई गई है। कुल्लू जिले के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों से होकर यह लाइन बिछाई गई है। प्रभावित ग्रामीणों को संबंधित कंपनियों की ओर से कोई भी मुआवजा नहीं दिया गया है।