एनआईटी हमीरपुर के सभागार में 28 और 29 मार्च को होने वाले फिल्मोत्सव में इस बार कुल 34 फिल्में दिखाई जाएंगी। फिल्मों की न्यूनतम अवधि 3 मिनट और अधिकतम 70 मिनट है। फिल्म फेस्टिवल के कोऑर्डिनेटर डा. सिद्धार्थ चौहान ने बताया कि समारोह के लिए देशभर से 60 से अधिक लघु फिल्में और डाक्यूमेंटरी फिल्में प्राप्त हुईं हैं।
इनमें से छात्रों के रुझान को देखते हुए शिक्षाप्रद, मनोरंजक एवं सामाजिक मुद्दों से जुड़ी फिल्मों का चयन किया गया है। मानवीय संबंधों के सूक्ष्म रेशों को सामने लाने वाली फिल्में भी हैं, जो दिल को छूने वाली हैं। इनमें दी गिफ्ट, लिटल टेररिस्ट, गुल, आखिरी मुनादी, खरा करोड़पति, आइस बेकर्स और एनकांउटर विद फेसस आदि लघु फिल्में कहानियों पर आधारित हैं।
संस्थान में कंप्यूटर साइंस के सहायक प्रोफेसर डा. सिद्धार्थ ने बताया कि दूरदर्शन की ओर से निर्मित एक फिल्म ‘लिटल पौलेंड इन इंडिया’ भी फेस्टिवल में दिखाई जानी है। पर्यावरण के विषय को ध्यान में रखकर दो अत्यंत महत्वपूर्ण वृत्तचित्र भी हैं।
ये फिल्में भी रहेंगी खास
‘दी मैन हू प्लांटेड जंगल’ और पौंग बांध में प्रवासी पक्षियों पर माइक पांडे की फिल्म है - हिमाचल्स एवियन पैराडाइज। मीनाक्षी वी एन राय की ‘लारीवालास ऑफ इंडिया’ ट्रक ड्राइवरों की पीड़ा को बयान करती है। चंबा की खूबसूरती पर एक फिल्म है- पल भर बेई लैणा हो।
हिमाचल के 5 फिल्म निर्माताओं की फिल्में फिल्मोत्सव में दिखाई जा रही हैं। इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण फिल्म देवकन्या ठाकुर की है ‘नो विमेंस लैंड’। यह फिल्म किन्नौर व और हिमाचल के दीगर कबाइली इलाकों में महिलाओं को जमीन जायदाद में अधिकार न देने पर उनकी अंतहीन यातना को दर्शाती है।
सभी फिल्में फिल्म समारोह निदेशालय दिल्ली, आईडीपीए और फिल्मस डिविजन ऑफ इंडिया, मुंबई और हिमाचल के फिल्म निर्माताओं से प्राप्त हुई हैं। फिल्मोत्सव में कुछ निर्माता निदेशकों सहित अनेक गणमान्य कलाकारों के आने की उम्मीद है। इनमें जालंधर दूरदर्शन के उप महानिदेशक डा. ओम गौरी दत्त शर्मा और आकाशवाणी शिमला के निदेशक देवेंद्र सिंह जोहल शामिल हैं।
इनकी फिल्में मचाएंगी धूम
फेस्टिवल में फिल्मी हस्तियों पर भी बनी बेहतरीन फिल्में शामिल हैं। इनमें शम्मी कपूर, मोहम्मद रफी, वी रिमेंबर यू, एंथनी गोंसालविस, सत्यजीत रे पर फिल्में हैं। 10 मिनट अवधि की ‘हैपी एनिवर्सरी’ हास्य से भरपूर फिल्म है।
निर्वासित प्रख्यात बांगला लेखिका और कट्टरवादियों के निशाने पर रही तसलीमा नसरीन पर चर्चित फिल्म है, जिसे चुर्नी गांगुली ने बनाया है। इस फिल्म के भी कोलकाता से प्राप्त होने की उम्मीद है। कुछ और लघु फिल्में भी दिखाई जा रही हैं। इनमें पौंग बांध विस्थापितों के दर्द की रेखांकित करती राजेंद्र राजन की ‘दी लॉस्ट रूटस’ भी है।
फिल्में देखने के लिए हमीरपुर के सभी शिक्षण संस्थानों को भी आमंत्रित किया गया है। ये फिल्में देखने के लिए प्रवेश निशुल्क है और ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।