आईएमसी की बायोकेमिस्ट्री मशीन में रीजेंट खत्म होने से दिक्कत, कई
अन्य रूटीन टेस्ट भी नहीं हो रहे
मरीजों को करना पड़ रहा है परेशानी का सामना
क्रस्ना लैब में लग रही लाइनें, रिपोर्ट में हो रही देरी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) की सरकारी लैब में बायोकेमेस्ट्री मशीन बंद हो गई है। इस कारण लैब में 15 टेस्ट नहीं हो रहे हैं।
टेस्ट करने के लिए आवश्यक टेस्ट रीजेंट (टेस्ट के लिए जरूरी रासायनिक पदार्थ) खत्म हो गए हैं। इस कारण मरीजों को भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में बायोकेमेस्ट्री मशीन के माध्यम से लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), कैल्शियम, प्रोटीन और बिलीरुबिन, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, शुगर, यूरिक एसिड जांच नहीं हो रही है। मरीजों को मजबूरी में क्रस्ना या फिर निजी प्रयोगशालाओं के धक्के खाने पड़ रहे हैं। आईजीएमसी में न केवल जिला शिमला बल्कि पूरे प्रदेश से मरीज उपचार के लिए आते हैं। सही उपचार के लिए मरीजों की ओर से चिकित्सकों को बताई जाने वाली बीमारियों के बाद टेस्ट लिखे जाते हैं। इसके बाद मरीज जब सरकारी लैब का रुख करते हैं तो उन्हें सुविधा नहीं मिल पाती है।
मरीजों का समय तक व्यर्थ हो रहा है। इससे मरीजों के उपचार में भी देरी हो रही है और चिंताएं दोगुणी हो रही है। एक तो मरीज अपनी बीमारी से परेशान हैं वहीं दूसरी ओर टेस्ट न होने से इधर-उधर धक्के खा रहे हैं। वहीं मरीजों के अस्पताल में निशुल्क में होने वाले टेस्ट अस्पताल के बाहर लैब में पैसे देकर हो रहे हैं। इससे मरीजों का आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है। दूसरी ओर मरीजाें को क्रस्ना लैब में टेस्ट के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ता है क्योंकि सुबह पहले सरकारी लैब कार्य करती है। दोपहर बाद क्रस्ना लैब में सैंपल लिए जाते हैं। इसके बाद रिपोर्ट में भी देरी हो जाती है और अगले दिन फिर मरीजों को आना पड़ता है।
उधर आपातकालीन स्थिति में टेस्ट करवाने आई शशिप्रभा, महिमा और ओपीडी में जांच के बाद लिखे टेस्ट करवाने आए महेश, विश्वचक्शु, नेहा, मनीषा ने कहा कि उन्होंने रुटीन टेस्ट करवाने में काफी दिक्कतें आ रही है। क्रस्ना लैब में भी दोपहर बाद टेस्ट हो रहे हैं। यहां मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती हैं तथा रिपोर्ट भी दूसरे दिन मिलती है। इस कारण दूर दराज के मरीजों को बार-बार अस्पताल आना पड़ता है।
क्रस्ना में टेस्ट करवाने से कतराते हैं मरीज
अस्पताल में निजी स्तर पर चलाई जा रही क्रस्ना लैब में मरीज टेस्ट करवाने से कतराते हैं। मरीजों का मानना है कि क्रस्ना लैब में टेस्ट करवाने में कई बार दिक्कत आती है। इससे मरीजों को फिर टेस्ट करवाने पर मजबूर होना पड़ता है। दो-दो बार टेस्ट के लिए ब्लड देना पड़ता है, जिससे काफी दिक्कतें आती है।
यह टेस्ट भी बंद
अस्पताल में इन दिनों टीपीओ और पीएसए टेस्ट भी नहीं हो रहे हैं। टेस्ट खासतौर पर थायराइड और प्रोस्टेट से जुड़ी बीमारियों की जांच के लिए जरूरी हैं। इसी के साथ एचबीए1सी, थायराइड, इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन बी12, विटामिन डी थ्री उपलब्ध नहीं है।