हिमाचल प्रदेश के लाहौल में उदयपुर के जंगल में वन विभाग के ट्रैप कैमरे में मादा हिमालयन कस्तूरी मृग कैद हुई है। विलुप्त हो रही यह वन्य जीव प्रजाति कई वर्षों के बाद देखी गई है। 1980 और 90 के दशक में कस्तूरी मृग का बड़े पैमाने पर अवैध शिकार हुआ। इस कारण यह प्रजाति अब न के बराबर है। लाहौल में वन विभाग की टीम ने दो दिन पहले उदयपुर के जंगल में मादा हिमालयन कस्तूरी मृग को देखा और इसेे अपने कैमरे में कैद किया है। कस्तूरी मृग मिलने से वन्य जीव विभाग उत्साहित है। अब इस पर ट्रैप कैमरों से नजर रखकर इसका संरक्षण किया जा रहा है। हालांकि लाहौल में अब वन्य जीवों का शिकार करना आसान नहीं है।
इसके लिए वन विभाग ही नहीं, बल्कि लाहौल की ग्रामीण महिलाएं खुद वन्य जीवों का संरक्षण कर रही हैं। लाहौल वन विभाग में कार्यरत वन खंड अधिकारी शिव कुमार, वन रक्षक महेश, गुरु राणा और आमिर जस्पा ने मादा कस्तूरी मृग को कैमरे में कैद किया है। वन विभाग की इस टीम ने पिछले कुछ सालों में लाहौल के पट्टन और उदयपुर रेंज में कई दुर्लभ पक्षियों और जानवरों की प्रजातियों को कैमरे में कैद किया है और उनके संरक्षण के लिए कदम उठाए हैं। वन मंडल अधिकारी लाहौल दिनेश शर्मा ने बताया कि हिमालयन कस्तूरी मृग एक विलुप्त हो रही प्रजाति है। कुछ दशक पहले इनके अवैध शिकार के कारण यह प्रजाति खतरे की श्रेणी में है। लाहौल के स्थानीय लोगों के सहयोग से वन विभाग ट्रैप कैमरा तकनीक और गश्त कर इनका संरक्षण कर रहा है।