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किसानों को मटर बीज के लिए करना होगा इंतजार, लेबोरेटरी भेजे गए हैं सैंपल

Sun, 23 Jun 2019 03:51 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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फाइल फोटो
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किसानों को मटर बीज के लिए अभी इंतजार करना होगा। गुणवत्ता जांचने के लिए मटर के बीज लेबोरेटरी में भेजे हैं। इसकी जांच के बाद ही बीज को ब्लॉक तक भेजा जाएगा। कृषि विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि मटर की बिजाई से पहले मिट्टी की जांच करवा लें। मिट्टी में यदि किसी प्रकार का किट पाया जाता है तो उसके इलाज के लिए कृषि विभाग को भी संपर्क कर लें।

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ब्लॉक अधिकारी से मिट्टी जांच की जानकारी किसानों को मिल सकती है। किसान खेतों में गोबर डाल लें और रसायनों का कम प्रयोग करें। इस साल कृषि विभाग किसानों को सस्ते दामों पर मटर बीज उपलब्ध करवा रहा है। सब्सिडी में 30 से 35 रुपये किलो की दर से बीज दिया जाएगा। अन्य लोगों को इसके लिए 64 रुपये देने होंगे। 

दस से पंद्रह दिन में मिल सकता है मटर बीज 
कृषि अधिकारियों की मानें तो मटर के यदि सैंपल सही आते हैं तो शिमला के हर ब्लॉक में अगले सप्ताह तक बीज पहुंच सकता है। बीज के सैंपल अगर फेल हो जाते हैं तो किसानों को बीज के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, राइजोबियम का इस्तेमाल करने से मटर की अधिक पैदावार मिल सकती है। इसके इस्तेमाल से मिट्टी में उर्वरता की कमी नहीं होगी। 
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यह है राइजोबियम 
मटर बीज को गुड़ के घोल में डुबोकर और इसकी बिजाई करने को राइजोबियम नाम दिया गया है। कृषि विभाग की मानें तो यह प्रक्रिया मिट्टी और बीज के लिए फायदेमंद होती है। इस प्रक्रिया से किसानों को अधिक पैदावार मिल सकती है। यदि खेतों को गोबर की सही मात्रा न मिली हो तो राइजोबियम गोबर की कमी को भी दूर कर देता है। 

ऐसे करें मटर की खेती के लिए खेत तैयार 
बरसाती मटर की खेती तैयार करने वाले किसानों को पहले मिट्टी की जांच करवानी होगी। अगर मिट्टी में ट्राइकोडर्मा की कमी पाई जाती है तो खेतों में गोबर के साथ ट्राइकोडर्मा को मिलाकर डालना होगा। अगर मिट्टी सही है तो अधिक पैदावार के लिए अधिक से अधिक गोबर डालना होगा। 

मटर की खेती करने से पहले किसानों को मिट्टी की जांच करवानी चाहिए। खेत में किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अधिक से अधिक गोबर खेतों में डालना चाहिए। मटर का बीज इन दिनों लेबोरेटरी में जांच को दिया गया है। अगले सप्ताह तक बीज मिल सकता है। - मोहेंद्र सिंह भवनी, जिला कृषि अधिकारी

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