संयुक्त किसान मंच का सरकार पर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप
बोले, सरकार के फैसलों से संकट में कृषि-बागवानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। किसानों-बागवानों के हितों के लिए संघर्ष कर रहे संयुक्त किसान मंच ने केंद्र सरकार और सरकार पर निजी कंपनियों के फायदे के लिए किसान-बागवानों के हितों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है।
मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण कृषि बागवानी पर संकट खड़ा हो गया है। निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए पहले खाद पर सब्सिडी खत्म की, अब खाद के रेट बढ़ा दिए हैं। किसान महंगी दरों पर बाजार से खाद खरीदने को मजबूर है। सरकार की नीतियों से गरीब किसान परेशान हैं। खेती के लिए खाद का इस्तेमाल किसान की पहुंच से बाहर हो गया है। हरीश चौहान ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों का विरोध करने के लिए ही ‘जवाब दो सरकार’ अभियान चलाया जा रहा है।
इन फैसलों से सरकार की किसानों की आय दोगुनी करने के दावों की असलियत भी सामने आ गई है। संजय चौहान ने कहा कि सरकार कृषि और बागवानी क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देकर कारपोरेट तथा निजी कंपनियों को फ ायदा पहुंचाने का काम कर रही है। कृषि और बागवानी में दी जाने वाली सब्सिडी तथा अन्य सहायता समाप्त की जा रही है। किसान बागवान लागत वस्तुओं खाद, बीज, कीटनाशक, फ फूं दनाशक तथा अन्य वस्तुएं बाजार से महंगी दरों पर खरीदने को मजबूर हैं।
सरकार तुरंत खाद की कीमतों में की गई वृद्धि वापस ले और कृषि-बागवानी में दी जाने वाली सब्सिडी बहाल कर किसानों को सस्ती दरों पर बीज, खाद, कीटनाशक, फंफूदनाशक और अन्य लागत वस्तुएं उचित मात्रा में मांग अनुरूप उपलब्ध करवाए। प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन (पीजीए) के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि बागवानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने में विफल रहने के बाद सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी कर परेशानी बढ़ा दी है। सेब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य देने विदेशी सेब पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के लिए सरकार कोई पहल नहीं कर रही। कार्टन और एंटी हेलनेट पर जीएसटी 5 से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया है। यह नीतियां किसान पर आर्थिक दबाव बना रही हैं।
खेती महंगी कर कैसे होगी
किसानों की आय दोगुनी
माकपा नेता और ठियोग कुमारसैन के विधायक राकेश सिंघा ने खादों की कीमतों में बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूछा कि क्या किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सरकार इस फार्मूले पर काम कर रही है। सेब सीजन में कार्टन, कीटनाशक, फफूंदीनाशक और मालभाड़े की दरें बढ़ाई गई। अब जब खेतों बागीचों में खाद डालने का समय आने वाला है तो खादों की कीमतें बढ़ा दी गई हैं।