बिलासपुर पुलिस कप्तान एसआर राणा ने कहा कि एफआईआर पुलिस के परिजनों पर नहीं, बल्कि एक समूह पर हुई थी, जिसने जेपी नड्डा के काफिले को रोका था। उन्होंने कहा कि इस मामले में न तो किसी की गिरफ्तारी की गई है और न ही अभी तक केस को कोर्ट भेजा गया है।
पांच दिसंबर को हिमाचल प्रदेश के बिलसापुर जिले के लुहणू में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का काफिला रोकने पर बिलासपुर पुलिस ने करीब 10 लोगों पर एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस अब मामले में क्लोजिंग रिपोर्ट बनाने की तैयारी कर रही है। बिलासपुर पुलिस कप्तान एसआर राणा ने कहा कि एफआईआर पुलिस के परिजनों पर नहीं, बल्कि एक समूह पर हुई थी, जिसने जेपी नड्डा के काफिले को रोका था।
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उन्होंने कहा कि इस मामले में न तो किसी की गिरफ्तारी की गई है और न ही अभी तक केस को कोर्ट भेजा गया है। मामले की जांच की जा रही है। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि सभी आम नागरिक हैं तो इस केस को कैंसल कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पांच दिसंबर को ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस कर्मचारी ने सूचना दी कि कुछ लोग जेपी नड्डा के काफिले को रोक रहे हैं। पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से सभी लोगों को गाड़ी में बैठाया और उनसे पूछताछ की। प्रोटोकाल का उल्लंघन करने का केस दर्ज करने के बाद उन सभी के एड्रेस ढूंढे गए और जब सबकी पहचान हुई तो उन्हें घर भेज दिया गया।
एसपी ने कहा कि उसके बाद पुलिस इस मामले के जरूरी पहलुओं पर काम कर रही है। पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद न ही उन लोगों को थाने बुलाया, न ही उन्हें परेशान किया, न किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही केस को कोर्ट भेजा गया है। कहा कि जांच में अगर सब सही पाया गया तो पुलिस केस को कैंसल करने की रिपोर्ट तैयार करेगी। कहा कि यह कार्रवाई एक समूह पर हुई थी, न कि पुलिस परिजनों पर हुई थी।