फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल: मोटे अनाज के उत्पादन की तरफ फिर लौटने लगे किसान, शिमला जिले के कुपवी में अढ़ाई बीघा में तैयार होगी फसल

Mon, 19 Feb 2024 12:32 PM IST
Krishan Singh विपिन कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चौपाल(रोहड़ू)

सार

शिमला जिले के चौपाल में किसी समय कुपवी की पहचान रहे मोटे अनाज कोदा, बाजरा, चौलाई, कांवणी, जावरी, ओगला और चिनई  उगाने की तरफ फिर से रुझान शुरू हो गया है। 
विज्ञापन
मोटे अनाज की खेती। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के चौपाल में किसी समय कुपवी की पहचान रहे मोटे अनाज कोदा, बाजरा, चौलाई, कांवणी, जावरी, ओगला और चिनई  उगाने की तरफ फिर से रुझान शुरू हो गया है। बेशक आज ये फसलें विलुप्त होने की कगार पर हैं। मौसम में आए परिवर्तन और कई अन्य कारणों से किसान इन फसलों से विमुख होते गए। ऐसी परिस्थिति से निपटने और इन फसलों के संरक्षण के लिए बीडीओ कुपवी अरविंद गुलेरिया ने विकास खंड में ‘मोटा अनाज उगाओ-मनरेगा पाओ’ योजना शुरू की है। अच्छी बात यह है कि अब किसान इन परंपरागत फसलों का महत्व समझने लगे हैं। यदि यह योजना सिरे चढ़ी तो परंपरागत फसलों का संरक्षण के साथ किसानों की आर्थिकी भी मजबूत होगी।

विज्ञापन


शुरुआत दौर में ही इस योजना ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है । जो किसान मोटे अनाज की खेती लगभग पूरी तरह छोड़ चुके थे, अब उनका रुझान इन फसलों की तरफ होने लगा है। कुपवी की विभिन्न पंचायतों के 80 से अधिक किसान इस योजना से जुड़कर एक से अढ़ाई बीघा जमीन पर इस वर्ष मोटे अनाज की फसल तैयार करेंगे। बदलती वैश्विक जलवायु से स्थानीय कृषि और खाद्य सुरक्षा को खतरा है।  कुपवी शिमला जिले का एक सुदूर उपविभाग है।

यह पारंपरिक बाजरा जैसे फिंगर बाजरा, फॉक्सटेल बाजरा, बार्नयार्ड बाजरा, ऐमारैंथस तथा अन्य प्रकार के पारंपरिक मोटे अनाज के लिए जाना जाता है। हालांकि, कुछ वर्षों से किसानों की रुचि ऐसे अनाजों से कम हो गई।  इन फसलों के संरक्षण के लिए एक प्रयास शुरू किया गया है। किसानों को कोदा, बाजरा व अन्य मोटे परंपरागत अनाज उगाने किसानों को भूमि विकास, सुरक्षा दीवार और वर्षा जल संचयन टैंक जैसी मनरेगा योजनाओं से प्रोत्साहित किया है।  किसानों द्वारा तैयार उत्पादों को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बाजार में बेचा जाएगा। संवाद
 

बाजरे में गेहूं-मक्की से ज्यादा पोषक तत्व 
बाजरा सहित अन्य मोटा अनाज ऐसी चुनौतियों का सामना कर सकता है, क्योंकि यह अनाज कम पानी की खपत करता है। बाजरा सहित अन्य मोटा अनाज सदियों से हमारे हार का एक अभिन्न अंग रहा है। बाजरे को पोषक अनाज भी कहा जाता है। इस अनाज को गेहूं व मक्की की तुलना में कई गुना पोषक माना गया है तथा इसमें कई रोग प्रतिरोधक तत्व पाए जाते हैं। 
विज्ञापन

मुहिम से जुड़े किसान
दिनेश शर्मा मालत पंचायत, राजेंद्र कुमार जुडु शिलाल, सुरेश कुमार पंचायत भालू, अशोक कुमार बांदल कफलाह, जोगिंद्र पंवार जुबली, अरुण शर्मा मझौली, कुलदीप जुबली, मोहन शर्मा झोकड़, कृष्णा मझौली, नारायण सिंह जुडु शिलाल, राम लाल मझौली, राजेंद्र शर्मा जुडु शिलाल, राजेश कुलग, कुलदीप, बेली राम, हीरा सिंह नौरा, सुरेश कुमार कुलग, मोहन शर्मा झोकड़, मोहर सिंह मालत इस वर्ष कोदा, बाजरा, चौलाई, कांवणी, जावरी, ओगला, चिनई आदि मोटे अनाज की फसलें तैयार करेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें