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Shimla News: किसानों का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दफ्तर के बाहर धरना

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सतलुज में अवैध डंपिंग का जताया विरोध
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किसानों ने बोर्ड के सदस्य सचिव को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय शिमला के बाहर किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। यह धरना सुन्नी में बांध निर्माण परियोजना के मलबे की अवैध डंपिंग के विरोध में दिया।

किसानों ने प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव अनिल जोशी से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि अगर 15 दिन में अवैध डंपिंग पर कार्यवाही नहीं की जाती है तो वह आंदोलन छेड़ देंगे। प्रदर्शन हिमाचल किसान सभा के नेतृत्व में हुआ। सुन्नी के किसानों का आरोप है कि एसजेवीएन और उसकी निर्माण कंपनी परियोजना स्थल से मलबे को निकालकर सतलुज नदी में फेंक रही है। किसानों ने बताया कि बांध निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे क्षेत्र में कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं।
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धूल के उत्सर्जन से फेफड़े की बीमारियां बढ़ रही हैं। साथ ही पौधों में परागण रुक गया है। कृषि और बागवानी फसलों में कमी आ रही है। विस्फोटक गतिविधियों से जलस्रोतों को भी नुकसान पहुंचा है और भूजल स्तर कम हो गया है। पंचायत चेबड़ी के किसानों ने शिकायत की कि लिफ्ट पेयजल योजना के नजदीकी क्षेत्र में परियोजना गतिविधि हो रही है जिससे पीने का पानी प्रदूषित हो रहा है।


कई बार उठाया है मामला : सिंघा
हिमाचल किसान सभा के नेता राकेश सिंघा ने कहा कि इस मुद्दे को कई बार सरकार के समक्ष उठाया है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पिछले साल 12 दिसंबर 2023 को हिमाचल के मुख्य सचिव से शिकायत की थी और सबूत के तौर पर एक वीडियो क्लिप भी साझा की थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव अनिल जोशी ने किसानों से मुलाकात करते हुए कहा कि अधिकारी क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे और जल्दी ही कार्यवाही की जाएगी।
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बोर्ड ने लगाया था 60 लाख का जुर्माना
सतलुज नदी के किनारे अवैध डंपिंग करने पर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सतलुज जल विद्युत निगम को 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। सतलुज के आसपास प्रदूषण और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने पर यह कार्रवाई की है। इससे पहले पिछले साल जुलाई में भी एसजेवीएन पर 5 लाख का जुर्माना लगाया था। निरीक्षण में अधिकारियों ने पाया कि बनाए जा रहे पुल, इनलेट और आउटलेट सुरंग के लिए की जा रही पहाड़ों की कटाई से निकलने वाले मलबे को सतलुज के किनारे फेंका है।
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